(मनोज राजपूत)पंजाब में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की जांच के लिए जारी हुई 500 रेपिड टेस्टिंग किट सबसे पहले पंजाब में डेराबस्सी को प्राप्त हुई हुई हैं। पहले ही दिन इनका इस्तेमाल भी किया गया। जवाहरपुर गांव में खांसी, बुखार या जुकाम की शिकायत वाले 15 लोगों के मौके पर रेपिड टेस्टिंग किट्स से सैंपल लिए गए जबकि तीन सैंपल डेराबस्सी अस्पताल में लिए गए। तुरंत परिणाम देने वाली इस किट की बदौलत सभी सैंपल्स में रिपोर्ट निगेटिव आई जो प्रशासन सहित डेराबस्सी हलकावासियों के लिए भी राहत का विषय है।
गांव जवाहरपुर के तमाम 497 घरों का मंगलवार को सेहत विभाग द्वारा डोर-टू-टू सर्वे किया गया है। प्रशासन पहली बार एक ही समय पर पांच-पांच मेडिकल टीमों के साथ युद्धस्तर की तैयारियों से लैस दिखा। सिविल सर्जन डॉ मनजीत सिंह ने बताया कि डॉ एचएस चीमा व डॉ विक्रांत की अगुवाई पांच मेडिकल टीमों में दस हेल्थ वर्कर पर्सनल प्रोटेक्शन गाउन से लैस थे जबकि एसआई राजिंदर सिंह अलग से अटैच थे। हेल्थ वर्कर्स पीपी गियर गाउन के अलावा आई शील्ड से लैस थे, वहीं सर्जिकल व एन-95 वाले डबल मास्क पहने हुए थे। एसएमओ ने बताया कि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू द्वारा दी गई किट्स से जवाहरपुर में अब बड़ी तादाद में लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। किट्स का इस्तेमाल खून सैंपल की टेस्टिंग से किया जाएगा। पॉजिटिव पाए जाने वाले लोग ही आगे एनपी टेस्ट के दायरे में लाए जाएंगे जबकि निगेटिव लोगोंको इसके इंतजार में दो दिनों तक क्वारेंटाइन भी रहना पड़ेगा।
कबाड़ में पड़ी मिली पहली मशीनी सेनेटाइजिंग टनल
सेहत मंत्री के आगमन पर यहां दो दिन पहले चालू की गई पहली सेनेटाइजिंग टनल मशीन अस्पताल के कोने में कबाड़ में पहुंचा दी गई। दो दिन पहले ही ऐसी दो मशीनें पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन के वाइस चेयरमैन मनप्रीत बनी संधू द्वारा डेराबस्सी सिविल अस्पताल और जीरकपुर नगर परिषद को भेंट की गई थी। मंगलवार सुबह सवा लाख रूपए की कीमत वाली मशीनें कबाड़ में पहुंचा दिए जाने की कार्रवाई को सियासी खींचतान का परिणाम माना जा रहा है परंतु सेहत मंत्री बलवीर सिद्धू ने स्पष्ट किया कि सेनेटाइजिंग टनल में जो केमिकल इस्तेमाल किया जाता है, उसे त्वचा सहित शरीर के लिए हानिकारक बताकर डब्ल्यूएचओ की मनाही पर भारत की आईसीएमआर ने भी इसका इस्तेमाल वर्जित कर दिया है।
बीमारी के प्रति बेपरवाह अप्रोच से बना मोहाली रेड जोन
मोहाली जिले समेत पंजाब के कुल 4 जिले रेड जोन में आए हैं जबकि मोहाली जिला सेहत मंत्री का गृह जिला है। इसकी वजह पूछने पर बलबीर सिद्धू ने कहा कि लोगों की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है। कुछ लोगों ने इस जानलेवा बीमारी की परवाह नहीं की और अब खुद के अलावा उनके संपर्क में आए परिवार समेत बाकी लोग भी उनकी बेपरवाह सोच का शिकार बने हैं। सेहत मंत्री ने कहा फिर भी कोरोना से नुक्सान कंट्रोल में है और जो केस पाॅजीटिव पाए गए हैं, उनकी हालत भी स्टेबल है। उन्होंने कोरोना से जूझ रहे परिवारों की जल्द रिकवरी की कामना भी की।
भीलवाड़ा जैसे वायरस कंट्रोल पर सेहत मंत्री असहमत
भीलवाड़ा शहर में प्रशासन ने कुछ दिनों में काेरोना वायरस पर अंकुश लगाकर राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय काम किया। क्या हॉटस्पॉट इलाकों में भीलवाड़ा की तर्ज पर काम कर वायरस से निपटा नहीं जा सकता? इस सवाल पर सेहत मंत्री बलबीर सिद्धू झेंप गए। उन्होंने असहमित प्रकट करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में एक जिला हेडक्वार्टर है और उन्हें पूरे प्रदेश का ख्याल है। भीलवाड़ा में वायरस कुछेक दिन नहीं, बल्कि उसमें 15 दिन लगे थे। वे भी तब जब प्रशासन ने 3 हजार लोगों का अमला संक्रमण जांच में लगा दिया था।
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