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भोपाल के कब्रिस्तानों में जनाजों की संख्या दोगुनी हो गई, काशी के मणिकर्णिका घाट पर शवों का दाह संस्कार सात गुना घट गया भोपाल में कोरोना से अब तक 1 शख्स की मौत हुई है,लेकिन अप्रैल के पहले 6 दिनों में यहां मुस्लिम समाज में मौत की दर अचानक बढ़गई है। शहर के दो बड़े कब्रिस्तानों में मार्च के महीने में 213 शवों को दफनाया गया था।यानी यहां हर दिन करीब 7 शव दफनाए गए लेकिन अप्रैल के शुरुआती 6 दिनों में ही यहां 93 शव पहुंच गए। यानी अबहर दिन 15 शव दफनाए जा रहे हैं। यह पिछले महीने की तुलना में दोगुना है।उधर, काशी के मणिकर्णिका घाट पर लॉकडाउन से पहले हर दिन करीब 100 शव दाह के लिए आते थे लेकिन अब इनकी संख्या 15-20 रह गई है। कोरोनावायरस के चलते देशभर में अब तक 200 से ज्यादा मौतें हो गई हैं। इन्हें इलेक्ट्रिक या गैस वाले शवदाह गृह में ही जलाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौजूद रहती है। इस महामारी के अलावा जो लोग मर रहे हैं, उनके लिए भी शमशान और कब्रिस्तान में सतर्कता बरती जा रही है। कब्रिस्तानों में शव दफनाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के लिए पर्चे लगाए गए हैं तोशमशान घाटों में दूर से ही शव के उपर लकड़ी सहित अन्य सामग्री रख दी जाती है। मध्यप्रदेश: भोपाल के कब्रिस्तानों में जनाजों की संख्या दोगुना से तीन गुना तक बढ़ गई भोपाल के जहांगीराबाद कब्रिस्तान में 1 से 31 मार्च तक 39 शवों को दफनाया गया यानी हर दिन औसतन 1 शव दफनायागया, जबकि अप्रैल के शुरुआती 6 दिनों में ही यह 17 हो गए, यानी अब औसतन हर दिन 3 शव यहां पहुंच रहे हैं। ठीक इसी तरह सैफिया कॉलेज के पास वाले कब्रिस्तान में 1 से 31 मार्च तक 174 शव आए, यानी हर दिन औसतन 5 से 6 के बीच में शव आए जबकि अप्रैल के 6 दिनों में ही यहां 76 शवों को दफनाया गया यानी अब हर दिन 12 से ज्यादा शव यहां पहुंच रहे। उत्तरप्रदेश: बनारस में शवों की संख्या घटी, पहले हर दिन 100 आते थे, अब 15 शव आ रहे वाराणसी में महा शमशान कहलाने वाले मणिकर्णिका घाट पर आम दिनों में पूर्वांचल, बिहार, झारखंड से रोज 80 से 100 शव दाह के लिए आते हैं। लॉकडाउन के बाद यह संख्या घटकर 15-20 रह गई है। यहां हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर इलेक्ट्रिक दाह संस्कार भी किया जाता है और एक कोरोना पॉजिटिव की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार यही किया गया था। कोरोना संक्रमित की मौत से पहले घाट को पूरी तरह खाली करवाया गया था और वहां सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद थी। काशी के मणिकर्णिका घाट पर आम दिनों में शव के दाह संस्कार के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है लेकिन लॉकडाउन के बाद से यहां 7 गुना तक शव कम आ रहे। राजधानी लखनऊ में छोटे बड़े मिलाकर 22 कर्बला हैं। यहां फरवरी में 190 और मार्च में 167 शवों को दफनाया गया। इस महीने एक से आठ अप्रैल के बीच इन कब्रिस्तानों में 55 जनाजे पहुंचे हैं। सभी कर्बला के बाहर लोगों के जनाजे के साथ और कब्र पर नहीं आने की हिदायत देता पर्चा भी चिपकाया गया है। पंजाब: घाट वाले कहते हैं- अस्थि ब्यास नदी में प्रवाहित कर दो, लेकिन लोग हरिद्वार ही जाना चाहते हैं लॉकडाउन के चलते पंजाब के ज्यादातर इलाकों में अस्थियों का प्रवाह रुका हुआ है। इस कारण शहरों में शमशान घाट के अंदर सभी लॉकर अस्थियों से फुल हो गए हैं। कई जगहों पर श्मशान घाट में संस्कार के लिए लकड़ियों की कमी भी होने लगी है। श्मशान घाट कमेटी के सदस्य लोगों को ब्यास दरिया में अस्थियां प्रवाहित करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अस्थियों को हरिद्वार ही ले जाना चाहते हैं। हरियाणा: कोरोना पॉजिटिव का अंतिम संस्कार लकड़ियों से नहीं, अस्थियों के लॉकर फुल चंडीगढ़ और मोहाली में इस महीने तीन कोरोना पॉजिटिव का संस्कार किया गया। शवदाह गृह के पंडित के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग की टीम ही एंबुलेंस में शव लाती है। वे सेफ्टी किट पहने होते हैं और वे ही लोग शव को बॉक्स में रखते हैं, हम तो सिर्फ स्विच ऑन करते हैं। पंचकुला में एक लकड़ी वाला शमशान घाट है लेकिन कोरोना पॉजिटिव को इलेक्ट्रिक या गैस वाले गृह में ही जलाया जाता है। कर्फ्यू के कारण लोग अब मृत परिजनों की अस्थियां प्रवाहित करने नहीं जा पा रहे हैं। सेक्टर-25 में सभी 125 लॉकर्स फुल हैं, 60 नए भी बना दिए गए हैं। वहीं, मोहाली में 40 के करीब लॉकर्स हैं जो फुल हैं। इनके अलावा बोरियों में भरकर भी अस्थियां रखीं हुईं हैं। जम्मू में पहली कोरोना संक्रमित पाई गई 61 साल की महिला की गुरुवार को मौत हो गई। दाह संस्कार के दौरान परिवार के कुछ लोगों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद थी। छत्तीसगढ़: ज्यादा लोगों को शव के साथ घाट में प्रवेश पर पाबंदी रायपुर के बैनर बाजार क्रबिस्तान में भी दफनाने की दर अप्रैल में बढ़ गई है। यहां फरवरी में 4 और मार्च में 5 लोगों को दफनाया गया था लेकिन अप्रैल के शुरुआती 6 दिनों में ही यहां 5 शवों को दफनाया जा चुका है। कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले जमील बताते हैं, “यहां आने वाली मैयत में ज्यादा लोगों को कब्रिस्तान में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। यहां आने वालो को दूर-दूर बैठने की हिदायत भी दी जाती है।” झारखंड : सहमे हुए हैं शमशान घाट के कर्मचारी, शव आने पर पहले मौत का कारण पूछते हैं रांची के सबसे बड़े हरमू, चुटिया मुक्तिधाम में दाह संस्कार कराने वाले पंडित और कर्मचारी कोरोना के चलते सहमे हुए हैं। मुक्तिधाम में दाह संस्कार कराने वाले राहुल राम कहते हैं, “शव आने पर सबसे पहले मौत का कारण पूछा जाता है। चिता सजाने के बाद जैसे ही पार्थिव शरीर को उस पर रखा जाता है, कर्मचारी दूर से ही लकड़ी सहित अन्य सामग्री रखते हैं, ताकि मृतक से किसी तरह का संक्रमण न फैले। 23 मार्च से 4 अप्रैल के बीच यहां 42 शव दाह संस्कार के लिए पहुंचे थे। 1 मार्च से 22 मार्च तक यह आंकड़ा 79 था। बिहार : कोरोना पीड़ित की मौत पर 4 लाख मुआवजा, सामान्य मौत पर भी लोग जांच करवा रहे बिहार सरकार कोरोनावायरस से मरने वालों के लिए चार लाख रुपए मुआवजे का ऐलान कर चुकी है। ऐसे में सामान्य मौत होने पर भी लोग अस्पताल प्रशासन पर कोरोना की जांच के लिए दबाव डाल रहे हैं। पटना के गांधी मैदान के पास वाले शमशान घाट पर जो लोग शव को जलाने के लिए आते हैं, उन्हें थोड़ी दूरी पर खड़ा रहने के लिए कहा जाता है। हर जगह सावधानी बरती जा रही है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें फोटो इंदौर के महू नाका कब्रिस्तान का है। दैनिक भास्कर की ही एक रिपोर्ट में सामने आया था कि इंदौर में कोरोना प्रभावित इलाकों के 4 कब्रिस्तानों में मार्च में 130 जनाजे आए थे, लेकिन अप्रैल के 6 दिनों में ही यहां 127 शवों को दफनाया गया।

देश के 6 राज्यों में 61% कोरोना संक्रमित मरीज; कुल आबादी की 27.3% यही रहती है, 52% लैब भी यहीं मौजूद (पवन कुमार) विश्व स्वास्थ्य संगठन और विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि जब तक ज्यादा जांच नहीं होंगी, तब तक मरीजों का सही आंकड़ा पता नहीं चलेगा और संक्रमण बेकाबू हाेता जाएगा। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बीच केंद्र और राज्य सरकारें टेस्टिंगबढ़ाने पर काम कर रही हैं। देश के 6 राज्यों में52% से ज्यादा लैब स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार सुबह तक देश में कुल 5 हजार 734 लोग कोरोना से संक्रमित थे। इनमें से 61% मरीज दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में हैं। इन छह राज्याें में देश की 27.3% आबादी रहती है, लेकिन काेराेनावायरस की जांच करने वाली 52% से ज्यादा लैब यहीं हैं। तेजी से टेस्टिंग के लिएअलग-अलग राज्यों में 21 नई लैब बनाने की तैयारी है। नई बनने वाली प्रयोगशालाओं में सेसात लैब इन्हीं छह राज्यों में बनाने का प्रस्ताव है। देश में जब संक्रमिताें की संख्या 4 हजार 67 थी, तब 284 जिले इस बीमारी से प्रभावित थे। इनमें से 156 जिले इन्हीं छह राज्यों में हैं। यहां लैब ज्यादा, मरीज भी ज्यादा राज्य लैब मरीज महाराष्ट्र 29 1135 तमिलनाडु 20 738 दिल्ली 15 669 तेलंगाना 25 427 केरल 14 345 कर्नाटक 14 181 जहां लैब कम, मरीज भी कम राज्य लैब मरीज झारखंड 2 4 बिहार 4 38 छत्तीसगढ़ 2 10 ओडिशा 4 42 उत्तराखंड 1 33 जांच लैब में दो शिफ्टों में काम करने की तैयारी सरकार देश में मौजूद और नई बनने वाली प्रयोगशालाओं का अधिकतम इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च(आईसीएमआर) के वैज्ञानिक डॉ. आर. गंगाखेड़कर ने कहा कि लैब की वर्किंग दाे शिफ्ट में करने की तैयारी है। इससे वर्तमान मेंरोजाना 13 हजार जांच की क्षमता को बढ़ाकर 26 हजार किया जा सकता है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें मुंबई में बीएमसी ने नेशनल स्पोर्ट क्लब को आइसोलेशन सेंटर बदल दिया है। देश के कुल संक्रमितों में से 61% मरीज दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में हैं।

रिटायर्ड फौजी ने ग्रेच्युटी-पेंशन के जोड़े हुए 15 लाख रु. प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिए, कहा- देश का पैसा है, उसे ही लौटा रहा हूं (एम रियाज हाशमी) कोरोनावायरससे लड़ने के लिए सेना से रिटायर्ड जूनियर कमीशन ऑफिसर (जेसीओ) मोहिंदर सिंह ने ग्रेच्युटी, पेंशन और कमाई से जोड़ी गई 15.11 लाख रुपए की रकम प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दी। उन्होंने कहा- मुझे जो भी मिला, इसी देश से मिला है। अब जरूरत है तो मैं देश का पैसा देश को लौटा रहा हूं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी एक आंख गंवा चुकायह जांबाज पत्नी सुमन चौधरी के साथ गुरुवार को पंजाब और सिंध बैंक पहुंचे और मैनेजर को चेक सौंप दिया। इस दौरान उन्होंनेभास्कर से कहा-मेरी उम्र 85 साल हो चुकी है। मुझे पैसा कहां लेकर जाना है। लोगों की भलाई में जा रहा है मुझे इसकी खुशी है।दंपति ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी विदेश में नौकरी करते हैंजबकि एक बेटी दिल्ली में है। रायपुर के दो बच्चों ने 1770 रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए रायपुर में 9 साल के ऐश्वर्य और 7 साल की बहन वीरा ने अपने गुल्लक में जमा किए 1770 रुपए मुख्यमंत्री सहायता कोष में दान दिए हैं। दोनों रायपुर के तात्यापारा के रहने वाले हैं। बुधवार को इन्होंने अपनी गुल्लक पुरानी बस्ती थाने के प्रभारी को सौंप दी। थानेदार ने भी बच्चों की बचत को सहायता कोष में जमा करा दिया। बस्ती थाने के प्रभारी को गुल्लक देतेऐश्वर्य और वीरा। 17 दिन में 4643 लोगों ने किया रक्तदान सरोकार का एक उदाहरण रांची में भी देखने को मिला। यहां 17 दिन में ही 4643 यूनिट ब्लड इकठ्ठा हो गया।राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के राजीव रंजन के अनुसार, 22 मार्च से 7 अप्रैल के बीच हुआ ब्लड डोनेशन झारखंड के लोगों के हौसले को दिखाता है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें मोहिंदर सिंह ने कहा, ‘मुझे जो भी मिला, इसी देश से मिला है। अब जरूरत है तो मैं देश का पैसा देश को लौटा रहा हूं।’

फाेर्ब्स की सूची से 12 दिन में 226 दाैलतमंद बाहर हुए, मुकेश अंबानी 13वीं से 21वीं रैंक पर खिसके काेराेनावायरस के कहर से दुनिया के अरबपति भी नहीं बच पाए हैं। गुरुवार काे जारी फाेर्ब्स 2020 सूची के अनुसार, 18 मार्च काे लिस्ट कोअंतिम रूप देते समय दुनियाभर में 2,095 अरबपति थे। यह आंकड़ा एक साल पहले के मुकाबले 58 कम है। वहीं, 12 दिन पहले सूची तैयार करने की शुरुआत के मुकाबले 226 अरबपति कम है। यानी 12 दिन में ही 226 अरबपतियाें की संपत्ति इतनी कम हो गई कि वे फोर्ब्स कीसूची से बाहर हो गए। सूची से यह भी खुलासा होता है कि इस बार 2,095 अरबपतियाें में से 51% (1062) की दाैलत घट गई है। वर्तमान में अरबपतियाें की कुल संपत्ति 8 ट्रिलियन डाॅलर है। साल 2019 के मुकाबले यह 700 अरब डाॅलर कम है। जानिए दुनिया और देश के शीर्ष उद्योगपतियों के हाल... जेफ बेजोस : घट गई संपत्ति अमेजन के सीईओ लगातार तीसरे साल शीर्ष पर आए हैं, लेकिन उनकीसंपत्ति 18 अरब डाॅलर घट गई है। इस साल उन्होंनेपत्नी मैकेंजी काे तलाक के बाद 36 अरब डाॅलर दिए। वह सूची में 22वें नंबर पर हैं। बिल गेट्स : रैंक बचाई माइक्राेसाॅफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स नंबर दोपर बरकरार हैं। हालांकि उनकी संपत्ति 96.5 अरब डाॅलर से बढ़कर 98 अरब डाॅलर हाे गई है। बरनार्ड अर्नाल्ट: बफेट से ऊपर पिछले साल चाैथे नंबर पर रहे बरनार्ड, वाॅरेन बफेट काे चाैथे स्थान पर धकेलकर एक पायदान चढ़ गए हैं। उनकी संपत्ति न घटी, न बढ़ी। हालांकि बफेट पहली बार अपने स्थान सेखिसके। मुकेश अंबानी: संपत्ति में कमी रिलायंस इंडस्ट्री के एमडी पिछले साल 50 अरब डाॅलर के साथ 13वीं रैंक पर थे। जियाे की सफलता के बावजूद काेराेना के चलते उनकी संपत्ति 5.7 अरब डाॅलर घट गई। दमानी: रैंक-संपत्ति दाेनाें बढ़ीं डीमार्ट का आईपीओ लाने के बाद राधाकृष्ण दमानीदेश के रिटेल किंग कहे जाते हैं। पिछले साल 11.1 अरब डाॅलर के साथ 122वीं रैंक पर थे। उनकी रैंक और संपत्ति दाेनाेें बढ़ी हैं। शिव नाडर: रैंक-संपत्ति गिरी सूची में तीसरे भारतीय शिव नाडर पिछली बार 14.6 अरब डाॅलर संपत्ति के साथ 82वीं रैंक पर थे। इस बार उनकी संपत्ति में कमी आई है, वहीं रैंक भी गिरी है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें अमेजन के संस्थापक और सीईओ जेफ बेजोस तीसरे साल शीर्ष पर हैं, लेकिन उनकी संपत्ति 18 अरब डॉलर घट गई है।

ज्योतिषाचार्य बोले- ये राहु का साल है, 14 अप्रैल से प्रकोप कम होगा, मई में मिलेगी राहत पर असर सितंबर तक रहेगा (ओमप्रकाश सोनोवणे)कोरोना से कब मुक्ति मिलेगी? यह सवाल आज सभी के मन में है। एक ओर दुनियाभर के वैज्ञानिक और डॉक्टर इसका कारगर इलाज ढूंढने में लगे हैं, वहीं देश-विदेश का शासन-प्रशासन नागरिकों को इस महामारी से बचाने और रोकथाम के प्रयासों में जुटा हुआ है। इस बीच, भास्कर ने यह सवाल उन चार नगरों को ज्योतिषाचार्यों के सामने रखा, जहां समयानुसारकुंभ (सिंहस्थ) लगता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है,‘‘ये राहु का साल है। 14 अप्रैल से कोरोना का असर कम होना शुरू होगा। मई तक यह नियंत्रित हो जाएगा, लेकिन इसका असर सितंबर तक रहेगा।’’ आइए जानते हैं उनकी रायः सौ साल में पहली बार ऐसे हालात बने, यह ज्योतिष के लिए शोध का विषय उज्जैन केपं. आनंद शंकर व्यास ने बताया कि25-27 दिसंबर 2019 तक षडग्रही योग बना था। इससे कोरोना की शुरुआत हुई। इसके पहले फरवरी 1962 में अष्टग्रही योग बना था। 23 मार्च से मकर में मंगल का प्रवेश हो गया, जहां शनि, गुरु पहले से हैं। इससे महामारी फैली। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में भीषण रूप दिखेगा। मई से राहत मिलेगी। सौ साल में ऐसे कोई ग्रह योग नहीं बने, जिनसे ऐसी स्थिति बनी हो। यह शोध का विषय है। भारत में अन्य देशों की तुलना में कम नुकसान, गुरु-शुक्र अच्छा फल देगा हरिद्वार के डॉ. हरिदास शास्त्री ने बताया कि कोरोना से भारत में इतना नुकसान नहीं होगा, जितना अन्य देशों में हुआ है। इस बार देवी नाव पर सवार हो कर आई हैं,इसलिए शुभता की शुरुआत हो गई है। इस साल के राजा बुध हैं और मंत्री चंद्रमा। बुध और चंद्र के राज में घबराने की जरूरत नहीं है। इस वर्ष की कर्क लग्न की कुंडली का स्वामी चंद्र है। यानी रोग भय कम होगा। गुरु और सूर्य का परिवर्तन अच्छा फल देगा। 6 मई के बाद ग्रहों के परिवर्तन से ही कोरोना से मुक्ति मिलने की संभावना काशी के प्रोफेसररामचंद्र पांडे ने बताया कि कोरोना से राहत की शुरुआत 13 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ हो जाएगी। 14 अप्रैल से लोग राहत महसूस करेंगे। मेष संक्रांति की कुंडली भी अच्छे समय का संकेत कर रही है। सूर्य अपनी उच्च राशि में आएंगे तो उनका प्रभाव शुरू हो जाएगा। गुरु, मंगल व शनि की मकर में युति से अभी यह प्रभाव दिख रहा है। 6 मई से कोरोना का प्रभाव क्षीण होने लगेगा। असर सितंबर तक रहेगा। 4 मई को बदलेगी मंगल की राशि जयपुर के पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि11 मई 2020 को बृहस्पति के वक्री होने के बाद से इसका असर कमजोर होगा। 4 मई को मंगल भी राशि बदलेंगे। इसके बाद कोरोना का असर कम होना शुरू हो जाएगा। ग्रह योगों के कारण स्थिति विकट प्रयागराज के प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि 2020 का योग 4 है, जो राहु का अंक है। उथल-पुथल तो मचेगी ही। इस पर ग्रह योगों के कारण स्थिति विकट हो गई है। आने वाले समय में ग्रहों के और उथल-पुथल नजर आएंगे। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें चेन्नई में कोरोनावायरस से मरीज की मौत के बाद शव को दफनाते निगम कर्मचारी। कोरोना से देश में अब तक 232 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। वहीं दुनिया में अब तक 94 हजार से ज्यादा लोगों मौतें हो चुकी हैं।

रोबोट बन रहे नए हीरो, मरीजों के इलाज और उनकी देखभाल से लेकर घर पर जरूरी सामान तक पहुंचा रहे कोरोनावायरस का संक्रमण दुनियाभर के लिए चुनौती बना हुआ है। यह इंसानों में तेजी से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति सैकड़ों लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसके मरीजों का इलाज करने वालों डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में रोबोट इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हम बात रहे हैं चीन के शहर वुहान की। जहां से कोरोनावायरस का संक्रमण फैला था। यहां कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए बनाए गए अस्थाई अस्पताल में रोबोट्स की टीम ने अस्थाई तौर पर मरीजों की देखभाल की। यहां रोबोट के द्वारा ही मरीजों को खाना परोसा गया। समय-समय पर उनका तापमान लिया गया। मशीनों द्वारा ही मरीजों से बातचीत भी की गई।ऐसा ही एक रोबोट क्लाउड जिंजर है, जिसे चीन की क्लाउडमाइंड्स ने बनाया है। यह कंपनी बीजिंग और कैलिफोर्निया में काम करती है। रोबोट्स की मदद से चलाए गए थे अस्पताल क्लाउडमाइंड्स के प्रेसिडेंट कार्ल झाओ ने इन ह्यूमेनॉइड रोबोट के बारे में कहा- यह उपयोगी जानकारी, बात करने और नाच-गाने के साथ मनोरंजन और यहां तक ​कि स्ट्रेचिंग अभ्यास के माध्यम से मरीजों की देखभाल कर रहे हैं। स्मार्ट फील्ड (अस्थायी) अस्पताल पूरी तरह से रोबोट्स की मदद से चलाए गए थे। एक छोटी मेडिकल टीम ने रिमोट से अस्पताल के रोबोट को नियंत्रित किया। मरीजों को रिस्टबैंड पहनाए गए, जो उनका ब्लड प्रेशर और अन्य वाइटल डेटा जमा करते थे। भविष्य में कर सकेंगे मरीजों की देखभाल इन रोबोट्स ने कुछ दिनों के लिए ही रोगियों को संभाला, पर इससे भविष्य की तस्वीर स्पष्ट हो गई कि रोबोट संक्रामक रोगों के मरीजों की देखभाल करेंगे। वहीं स्वास्थ्य कर्मचारी सुरक्षित दूरी से उनकी मदद लेंगे। थाईलैंड, इजरायल जैसे देशों में मरीज डॉक्टरों से परामर्श के लिए रोबोट के साथ मिलते हैं। कुछ रोबोट मरीजों के फेफड़ों का चेकअप करते हैं। यह पूरा काम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होता है। अमेरिका: ऑटोनोमस व्हीकल से टेस्टिंग फ्लोरिडा के मेयो क्लीनिक ने अमेरिका में पहली बार कोरोना टेस्टिंग के लिए ऑटोनोमस व्हीकल लॉन्च की है। यह सैंपल लेकर लैब में पहुंचाती है। इसमें इंसान की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए संक्रमण की फिक्र भी नहीं है। वॉशिंगटन में स्टारशिप टेक्नोलॉजी ने डिलीवरी रोबोट के जरिए सामान भेजना शुरू कर दिया है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें फ्लोरिडा के मेयो क्लीनिक ने अमेरिका में पहली बार कोरोना टेस्टिंग के लिए ऑटोनोमस व्हीकल लॉन्च की है। यह सैंपल लेकर लैब में पहुंचाती है।

दिल्ली के मोहल्लों में फल-सब्जी बेचने वालों के आधार कार्ड चेक हो रहे, मुस्लिम मिले तो उन्हें भगा दिया जाता है बीते तीन दिनों से एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। यह वीडियो दिल्ली के शास्त्री नगर इलाके का है और इसमें 15-20 लोग एक गली में मीटिंग करते हुए देखे जा रहे हैं। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति इसमें बोल रहा है, ‘शास्त्री नगर में एक मीटिंग होने जा रही है। ये जो मोमेडियन आते हैं गलियों में, बिलकुल नहीं घुसने देंगे मुसलमानों को हम गली में। हम एक मीटिंग कर रहे हैं और आप लोगों से भी निवेदन है कि आप लोग भी अपनी गली-मोहल्ले के अंदर किसी भी मुसलमान को न घुसने दें। उनका आधार कार्ड चेक करो, उनका नाम पूछो, कोई भी मुसलमान है तो आप उनको भगाइए। गंदपना कर रहे हैं ये लोग। तो मेरी आपसे रिक्वेस्ट है कोई भी घुसने न दे इनको, मोमेडियन को।’ वीडियो बनाने वाला व्यक्ति जब ये बोल ही रहा है तो इस गली में दो सब्जी बेचने वाले पहुंचते हैं। इस पर वहां मौजूद लोग सब्जी वालों से पहचान पत्र मांगते हैं और कहते हैं, ‘कल से आधार कार्ड लेकर आना वरना आना मत इस तरफ। डंडे पड़ेंगे बहुत।’ ये कहने के साथ ही इन सब्ज़ी वालों को वहांसे दुत्कार कर भगा दिया जाता है और वीडियो में आगे कहा जाता है, ‘ये देख रहे हो भाई साहब। अभी एक को पकड़ा था, उसने अपना नाम बताया मिश्रा और था वो मोहम्मद इमरान। उसको भी मार कर भगाया अभी हमने।’ सोशल मीडिया पर आने के बाद से वीडियो हजारों लोग शेयर कर चुके हैं। ट्विटर से लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप पर कई लोग इस वीडियो का यह कहते हुए समर्थन कर रहे हैं कि सभी लोगों को अपने-अपने मोहल्ले में ऐसा ही करना चाहिए तो दूसरी तरफ कई लोग इस वीडियो के जरिए दिए जा रहे सांप्रदायिक संदेश की भर्त्सना भी कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस वीडियो की पड़ताल की है। वीडियो की सच्चाई जानने के लिए जब हम उत्तरी दिल्ली के शास्त्री नगर इलाके पहुंचे तो शुरुआत में वहां के अधिकतर लोगों ने इस वीडियो को फर्जी बताया। हालांकि इस क्षेत्र के लगभग सभी लोग इस वीडियो को देख चुके थे। यहां प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने वाले आरके शर्मा कहते हैं, ‘हम सभी लोगों ने ये वीडियो देखा है। लेकिन ये शास्त्री नगर का नहीं है। हमारे इलाके में हिंदू-मुस्लिम भेदभाव जैसी कोई घटना कभी नहीं हुई। ये इस इलाके को बदनाम करने के लिए किसी ने शरारत की है।’ इसी इलाके में बीते 12 साल से सब्जी बेचने वाले रणवीर सिंह को जब भास्कर ने यह वीडियो दिखाया तो उनकाकहना था, ‘हां ये वीडियो यहीं बी-ब्लॉक का है।’ वीडियो में दिख रही बिल्डिंग को पहचानते हुए रणवीर सिंह ने बताया कि यह वीडियो ललिता विहार स्कूल के पास स्थित मोहल्ले में बनाया गया है। रणवीर सिंह के बताए अनुसार जब हम ललिता विहार के पास पहुंचे तो वह बिल्डिंग नजर आई जो वीडियो में भी देखी जा सकती है। इसके साथ ही वीडियो की एक झलक में दिखता है कि एक घर के बाहर ‘रोटी बैंक’ लिखा हुआ है। यह घर भी हमें इस इलाके में नजर आया जिससे यह स्थापित हो गया कि वायरल हो रहा वीडियो इसी मोहल्ले में बनाया गया है। इस मोहल्ले का नाम ‘गुड लिविंग सोसाइटी’ है। वायरल वीडियो में एक घर नजर आता है, जहां 'रोटी बैंक' लिखा हुआ है। यह शास्त्री नगर के बी ब्लॉक में ही है। यहां मोहल्ले के लोग मिलकर आवारा पशुओं के लिए एक ‘रोटी बैंक’ चला रहे हैं। हर सुबह 11 बजे ये लोग इसी सम्बंध में एक मीटिंग भी करते हैं। रविवार को इसी मीटिंग के दौरान वायरल वीडियो को शूट किया गया था इस वीडियो में नजर आ रहे कई लोगों में से एक संजय कुमार जैन भी हैं जो यहीं रहते हैं। संजय कहते हैं, ‘काफी समय से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें दिख रहा है कि मुस्लिम लोग सब्जियों या फलों में थूक लगा कर बेच रहे हैं। इसीलिए मोहल्ले के लोगों ने तय किया कि यहां जो भी सब्जी बेचने आए उसकी पहचान देखी जाए और सिर्फ पुराने सब्जी वालों को ही आने दिया जाए।’ इस वीडियो में नजर आ रहे हैं एक अन्य व्यक्ति नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘ये वीडियो किसने बनाया और इसमें आवाज किसकी है वो हम नहीं बता सकते। लेकिन हां हम सब लोग इस वीडियो में दिख ही रहे हैं। उस दिन हम लोग रोज के तरह ही मीटिंग कर रहे थे तभी ये बात उठी कि मुस्लिम सब्जी वाले थूक कर सब्जियां बेच रहे हैं। आपने भी देखा होगा ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं। इसलिए हमने तय किया कि यहां किसी मुसलमान को नहीं आने देंगे। हालांकि बाद में ये तय हुआ कि अब यहां सिर्फ दो-तीन वही सब्जी वाले आएंगे जो सालों से आते रहे हैं और जिन्हें हम पहचानते हैं।’ शास्त्री नगर का यह इलाका सराय रोहिल्ला पुलिस थाने के अंतर्गत आता है। भास्कर ने जब यहां के थानाध्यक्ष लोकेंद्र सिंह से इस मामले पर बात की तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया। लेकिन इस क्षेत्र के एसीपी आरके राठी ने भास्कर को बताया, ‘यह मामला हमारे संज्ञान में आया है और इस सम्बंध में हमने एफआईआर भी दर्ज कर ली है। हम लोग इस मामले की जांच कर रहे हैं।’ यह पूछने पर कि सब्जी या फल बेचने वालों के साथ उनकी धार्मिक पहचान के चलते जो भेदभाव हो रहा है, उसे रोकने के लिए क्या पुलिस ने कोई कदम उठाए हैं? एसीपी राठी कहते हैं, ‘हम लोग जगह-जगह यह घोषणा करवा रहे हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति इस तरह से सांप्रदायिक संदेश फैलाते या ऐसा कोई भेदभाव करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। हम इसका ध्यान रख रहे हैं कि किसी के साथ भी ऐसा भेदभाव न हो।’ शास्त्री नगर इलाके में मुस्लिमों के अलावा बाकी लोग आपको फल-सब्जी बेचते हुए नजर आ जाएंगे। एसीपी राठी यह आश्वासन तो देते हैं कि किसी भी फल-सब्जी वाले के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा लेकिन फल सब्जी बेचने वालों के अनुभव इसके ठीक उलट हैं। शास्त्री नगर और उसके आस-पास के इलाकों में घूम-घूम कर फल बेचने वाले मोहम्मद अनस कहते हैं, ‘पिछले तीन-चार दिनों से हमें किसी भी गली-मोहल्ले में लोग आने नहीं दे रहे। लोग हमसे पहचान पत्र मांगते हैं और हमारा नाम देखते ही भगा देते हैं। लोग गाली देते हुए कहते हैं कि तुम लोग थूक लगाकर फल बेचते हो, आगे से इस मोहल्ले में दिखाई दिए तो तुम्हारा ठेला पलट देंगे।’ लगभग ऐसा ही अनुभव मोहम्मद सलमान का भी है जो इस इलाके में अंगूर बेचा करते हैं। वो कहते हैं, ‘लगभग सभी मोहल्लों में कोई न कोई आकर हमसे पहचान दिखाने को बोल ही देता है। हम लोग अब डर के कारण मोहल्लों में जा ही नहीं रहे बाहर मेन रोड पर ही ठेला लगा रहे हैं। लेकिन यहां भी जो लोग रुकते हैं उनमें से कुछ पहले नाम पूछते हैं और नाम सुनते ही आगे बढ़ जाते हैं। अभी दो दिन पहले तो मेरे ठेले पर चार-पांच ग्राहक खड़े थे तभी एक आदमी एक्टिवा पर आया और मेरा नाम पूछने लगा। मैंने अपना नाम बताया तो वो ग्राहकों से कहने लगा कि आप इससे फल क्यों खरीद रहे हो ये लोग थूक कर फल बेचते हैं।’ सलमान आगे कहते हैं, ‘सर, हमें नहीं पता जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें वो मुस्लिम आदमी क्यों थूक लगाकर फल बेच रहा है। पता नहीं वो आदमी पागल है या क्या है। ये भी नहीं पता कि वो वीडियो सच्चा है या झूठा है। लेकिन उसकी क़ीमत हम लोग चुका रहे हैं। लोग हमें गालियां दे रहे हैं, मारने की धमकी दे रहे हैं। हमारी बिक्री आधे से कम रह गई है। हम लोग क्यों थूक लगाकर फल बेचेंगे सर? हमारी रोजी चलती है इन फलों से, ऐसा घटिया काम हम क्यों करेंगे और हमें क्या मिलेगा ऐसा करने से?’ सिर्फ सलमान और अनस ही नहीं, उत्तरी दिल्ली में फल-सब्ज़ी बेचने वाले तमाम लोग ये बताते हैं कि बीते कुछ दिनों से उन लोगों से उनके पहचान पत्र मांगे जाने लगे हैं। पहचान जांचने का काम पुलिस या कोई अधिकारी नहीं बल्कि गली-मोहल्ले के आम लोग कर रहे हैं। गाजीपुर के रहने वाले अशोक कुमार बीते एक दशक से भी ज्यादा से उत्तरी दिल्ली में सब्जी बेच रहे हैं। वो बताते हैं, ‘इतने सालों में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इन दिनों कोई भी आकर हमसे पहचान पत्र मांग लेता है इसलिए हम लोग आधार कार्ड साथ में ही रखने लगे हैं। हम लोगों का नाम देख कर तो लोग कुछ नहीं कहते लेकिन मुस्लिम सब्जी वालों को लोगों ने गली में आने से मना कर दिया है। लाल बाघ में मेरे आस-पास जो मुस्लिम लोग रहते हैं, उनके लिए इन दिनों काम करना बहुत मुश्किल हो गया है।’ 28 साल के बृजेश कुमार कहते हैं, ‘पहचान पत्र तो सभी से मांगा जा रहा है। हिंदू-मुस्लिम सब इससे परेशान हो रहे हैं। लेकिन हमें पहचान देखने के बाद कोई कुछ नहीं कहता जबकि मुस्लिम लोगों को लोग भगा देते हैं। ये जमातियों का जो मामला हुआ है उसके बाद ऐसा ज्यादा होने लगा है। लोग मुसलमानों से सामान खरीदना नहीं चाह रहे।’ फल-सब्जी वालों से उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव का यह मामला सिर्फ शास्त्री नगर तक ही सीमित नहीं है। पिछले तीन-चार दिनों में गुलाबी बाग, त्रिनगर, अंधा मुगल और आदर्श नगर जैसे कई इलाकों में ऐसी घटनाएं हुई हैं जब वहां फल-सब्जी बेचने वालों की मुस्लिम पहचान देखने के बाद उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें इन इलाकों में दोबारा न आने की धमकी दी गई। 32 वर्षीय शिव सिंह कहते हैं, ‘गुलाबी बागमें तो मेरे सामने मोहल्ले में लाउड स्पीकर से यह घोषणा हुई कि अब से किसी भी मुस्लिम को यहां सब्जी-फल बेचने के लिए नहीं आने दिया जाएगा।’ मुस्लिम फल-सब्जी विक्रेताओं के साथ हो रहे इस भेदभाव के पीछे का मुख्य कारण भी एक वीडियो ही है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक मुस्लिम व्यक्ति अपने अंगूठों पर बार-बार थूक लगाकर फल रख रहा है।दैनिक भास्कर ने जब इस वीडियो की पड़ताल की थी तोपता चला था कि यह वीडियो मध्य प्रदेश के रायसेन का है और इसमें दिखाई दे रहेशख्स का नाम शेरू मियां हैं। जगह और नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने 3 अप्रैल को शेरू मियां के खिलाफ धारा 269 और 270 के तहत एफआईआर दर्ज की। ये दोनों धाराएं किसी बीमारी को फैलाने के आरोप में लगाई जाती है। हालांकि भास्कर की पड़ताल में यह भी पता चला था कि यह वीडियो करीब 2 महीने से ज्यादा पुराना है, जैसा कि वीडियो में देखा भी जा सकता है कि शख्स ने ठंड के दिनों में जैकेट डाल रखा है। भास्कर ने जब शेरू खान की बेटी से इस बारे में बात की थी तो उनका कहना थाकि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि इसके बावजूदयह कहते हुए इस वीडियो को वायरल किया जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग कोरोना संक्रमण को फैलाने के लिए फल-सब्जियों में थूक कर बेच रहे हैं। नतीजा ये हुआ कि उस वायरल वीडियो और उससे जुड़ी अफवाहों का खामियाजा अब देश भर के न जाने कितने मुस्लिम फल-सब्जी विक्रेताओं को बेवजह भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली के इन तमाम विक्रेताओं के अलावा गुरुग्राम, उत्तराखंड, झारखंड और देश के कुछ अन्य हिस्सों से भी ऐसी खबरें सामने आई हैं, जहां मुस्लिम समुदाय के फल-सब्जी विक्रेताओं के साथ बदसलूकी या मारपीट की गई है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें सफेद तोलिये से मुंह बांधे खड़े मोहम्मद सलमान उत्तरी दिल्ली में फल बेचते हैं। सलमान कहते हैं- 'हमारी रोजी इन फलों से चलती है और लोग हमें गालियां देकर जा रहे हैं कि तुम फलों में थूक लगाकर फल बेच रहे हो। भला हम ऐसा घटिया काम क्यों करेंगे?'

इटली के रास्ते पर भारत, मौत और केस की रफ्तार एक जैसी, समय में बस एक महीने पीछे नई दिल्ली. भारत में कोरोनावायरस के केस और मौतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे देश में वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ गया है, इसी को कोरोना का थर्ड फेज भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अब थर्ड फेज की दहलीज पर खड़ा है। इसकी असल तस्वीर लॉकडाउन खत्म होने यानी 14 अप्रैल से पहले साफ हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि भारत में कोरोना का ग्राफ इटली जैसा ही दिख रहा है। अंतर बस समय का है। कोरोनावायरस के मामलों और मौतों के लिहाज से देखें तो भारत तकरीबन इटली के रास्ते पर ही बढ़ रहा है। बस हम समय में उससे एक महीने पीछे हैं। वर्ल्ड मीटर के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल तक भारत में कोरोना के 1998 केस आए थे और 58 मौतें हुई थीं। एक महीने पीछे यानी एक मार्च के इटली के आंकड़े देखें तो वहां इस तारीख तक कोरोना के 1577 केस आए थे, जबकि मौतें 41 हुई थीं। सोमवार यानी छह अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस के 4778 केस सामने आ चुके हैं, जबकि 136 मौतें हुई हैं। अब इससे एक महीने पीछे चलें, यानी इटली में 6 मार्च तक का कोरोना ग्राफ देखें तो वहां 4636 केस आए थे, जबकि 197 मौतें हुई थीं। रोजाना की स्थिति: भारत में अब रोज उतने ही केस आ रहे, जितने एक महीने पहले रोज इटली में आ रहे थे भारत और इटली में रोजाना के केस और मौतों की संख्या भी लगभग एक जैसी ही है। यहां भी बस अंतर समय का है। एक महीने पहले इटली में रोजाना भारत जितने ही केस आ रहे थे और मौतें भी लगभग बराबर हो रही थीं। इटली में एक मार्च को 573 केस आए थे और 12 मौतें हुई थीं। एक महीने बाद भारत में एक अप्रैल को 601 केस आए और 23 मौतें हुईं। रोजाना की मृत्युदर: भारत में कोरोना से रोज की औसत मृत्युदर भी एक महीने पहले के इटली जैसे ही है कोरोनावायरस से भारत और इटली में रोजाना की मृत्युदर भी लगभग एक जैसी है। दोनों देशों के बीच अंतर सिर्फ समय का है। आंकड़ों पर गौर पर करें तो पता चलता है कि एक महीने पहले इटली में कोरोना से रोजाना की औसत मृत्युदर तकरीबन भारत के मौजूदा हालात जैसे ही थे। 1 मार्च को इटली में कोरोना से मृत्युदर 33.01 फीसदी थी। एक महीने बाद 1 अप्रैल को भारत में कोरोना से मृत्यदर 28.16 फीसदी थी। भारत में अब तक कोरोनावायरस के केस कम होने के पीछे की बड़ी वजहें 1- कम टेस्टिंग होना: भारत में अभी तक सिर्फ 85 हजार लोगों का ही कोरोनावायरस टेस्ट हुआ है, यानी एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो रहा है 130 करोड़ आबादी वाले देश में जिस तरह कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग और सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं, वो नाकाफी हैं। भारत में अब तक करीब 85 हजार टेस्ट हो पाए हैं। कुछ राज्यों में अबभी रोजाना-250 से 500 तक टेस्ट ही किया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति के कई टेस्ट होते हैं। इसलिए भी भारत में कोरोना के केस कम आए हैं।भारत में अभी एक लाख की आबादी पर महज 6.5 लोगों की ही टेस्ट हो सका है। वहीं, दुनिया के अन्य देशों इसकी स्थिति भारत से उलट है। दक्षिण कोरिया की आबादी महज 5.1 करोड़ है। वहां अब तक 2.5 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। एक अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक हर एक लाख की आबादी पर बहरीन ने 20,075 लोगों का, दक्षिण कोरिया ने 8,222 का, इटली ने 8,385 का, ऑस्ट्रिया ने 6,203 का, ब्रिटेन ने 2,109 का, अमेरिका ने 447 का, जापान ने 257 लोगों का कोरोना टेस्ट किया है। चीन ने मार्च के अंत तक कुल 3.20 लाख लोगों का टेस्ट किया था। 2- लॉकडाउन जल्द लागू होना: इस वजह से कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, इसीलिए अभी रोजाना औसतन 500 केस ही सामने आ रहे हैं डब्ल्यूएएचओ काकहना है कि भारत सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन लागू किया।इसीलिए देश में कोरोना के केस कम आ रहे हैं। भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार चीन, अमेरिका ओर यूरोपीय देशों के तुलना में काफी धीमी है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन तक देश में 374 केस थे। उसके बाद 8 दिनों में करीब 820 केस सामने आए हैं। यानी एक दिन में औसतन 100 केस ही सामने आए। 31 मार्च को 1635 केस थे। 6 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 4778 हो गई। यानी 6 दिन में 3145 केस आएहैं। देश में अब औसतन एक दिन में 500 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि भारत में कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, अभी यह तीसरे स्टेज में नहीं पहुंच पाया है। जिसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का फेज भी कहा जाता है। जबकि अमेरिका में 10 दिन में ही कोरोनावायरस के केस एक हजार से 20 हजार तक पहुंच गए थे। 3- बीसीजी का टीका लगना: भारत समेत दुनिया के जिन देशों में लंबे समय से बीसीजी का टीका लग रहा, वहां लोगों में कोरोनावायरस का खतरा कम है भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार कम होने के पीछे बीसीजी टीके को भी खास बताया जा रहा है। दरअसल, भारत में 72 साल से बीसीजी के जिस टीके का इस्तेमाल हो रहा है, उसे दुनिया अब कोरोना से लड़ने में मददगार मान रही है। न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका और इटली जैसे जिन देशों में बीसीजी वैक्सीनेशन की पॉलिसी नहीं है, वहां कोरोना के मामले भी ज्यादा सामने आ रहे हैं और मौतें भी ज्यादा हो रही हैं। वहीं, जापान और ब्राजील जैसे देशों में इटली और अमेरिका के मुकाबले मौतें फिलहाल कम हैं। बीसीजी का पूरा नाम है, बेसिलस कामेट गुएरिन। यह टीबी और सांस से जुड़ी बीमारियों को राेकने वाला टीका है। बीसीजी को जन्म के बाद से छह महीने के बीच लगाया जाता है। मेडिकल साइंस की नजर में बीसीजी का वैक्सीन बैक्टीरिया से मुकाबले के लिए रोग प्रतिरोधक शक्ति देता है। इससे शरीर को इम्यूनिटी मिलती है, जिससे वह रोगाणुओं का हमला झेल पाता है। हालांकि, कोरोना एक वायरस है, न कि बैक्टीरिया। जो थ्योरी फेल हो गई- गर्म मौसम की वजह से: ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना ज्यादा फैला, इसलिए लोग खुद ही सोचने लगे कि गर्मी में यह वायरस नहीं फैलता, एक्सपर्ट्स अभी किसी नतीजे पर नहीं कोरोनावायरस अभी तक सबसे ज्यादा ठंडे मौसम वाले देशों में फैला है और इन्हीं देशों में सबसे ज्यादा मौतें भी हुईं। इसलिए लोग खुद-ब-खुद मानने लगे कि कोरोना गर्म जलवायु वाले देशों में कम फैलता है। सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश भी बहुत शेयर किए गए। जबकि यह थ्योरी फेल हो चुकी है, क्योेंकि ब्राजील और खाड़ी के कुछ देशों में अब कोरोना तेजी से फैल रहा है। वो भी गर्मी के बावजूद। इसके अलावा टाइफाइड गर्मी के मौसम में चरम पर होता है। खसरे के केस गर्म इलाकों में गर्मीके मौसम में कम हो जाते हैं, वहीं ट्रॉपिकल(गर्म) इलाकों में शुष्क मौसम में खसरे के केस चरम पर होते हैं। शायद इसलिए ही कहा जा रहा था कि कोविड-19 पर भी गर्म मौसम का असर होगा। भारत में गर्मी में कोरोना खत्म हो जाएगा। लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसको लेकर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक भी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच हैं। इसके बारे में ब्रिटिश डॉक्टर सारा जार्विस कहती हैं कि 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी, जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन ये तापमान बदलने की वजह से हुआ या किसी और अन्य वजह से ये बताना मुश्किल है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Italy India Coronavirus | Italy Coronavirus Death Toll Latest Vs India COVID-19 Cases Updates: Reasons Why India Might Not Look Like Italy

कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन से लोगों में दहशत, अब तक इस तरह संक्रमित हुए 13 मरीजों की मौत; सरकार ने मास्क पहनना जरूरी किया (मनीषा भल्ला)मुंबई में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,अब तक कोरोनावायरस के करीब 590पॉजिटिव केस मिले हैं। यह देश के किसी शहर में संक्रमित लोगों की सर्वाधिक संख्या है।बृहंमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के मुताबिक 590 में से 282 पॉजिटिव डी, ई, जी साउथ और के-वेस्ट वॉर्ड मेंमिले हैं। यानी संक्रमण के 59% केस शहर के 24 प्रशासनिक वार्ड में से सिर्फ 4 में हैं। इनमें 133 केस तो जी साउथ वार्ड में ही हैं। इस वायरस से मुंबई में अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है। कम्युनिटी ट्रांसमिशन के मामले बढ़े मुंबई में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बीमारी केकम्युनिटी ट्रांसमिशन के मामले बढ़ रहे हैं। यानी संक्रमित व्यक्ति नकिसी मरीज के संपर्क में आया और न ही उसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री है। ऐसे 11 मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। हालांकि, बीएमसी के कमिश्नर प्रवीण परदेसी बेशक कहतेहैं कि मुंबई में संक्रमित केस बढ़ने की वजह टेस्टिंग है। उनका कहना है किदिल्ली में 10 लाख में से 96 की टेस्टिंग हो रही है, जबकि मुंबई में 816 की। लेकिन, यह भी सच है कि मुंबई में मेडिकल स्टाफ और सुरक्षाकर्मी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। मुंबई में 40 से ज्यादा नर्स संक्रमित हो चुकी हैं। अकेले मध्य मुंबई के वॉकहार्ट हॉस्पिटल में ही 25 से ज्यादा डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी संक्रमित हैं। पूरा अस्पताल क्वारैंटाइन सेंटर में तब्दील हो गया है। यहां से न किसी को बाहर जाने की इजाजत हैऔर न ही किसी को अंदर आने की अनुमति है। अस्पताल स्टाफ ने क्वारैंटाइनमें जाने की मांग की बांद्रा के भाभा अस्पताल में नर्स की मौत के बाद बुधवार को कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। अस्पताल स्टाफ ने क्वारैंटाइनमें जाने की मांग की। कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए रहे हैं।ज्यादातर डॉक्टरों और नर्सों को मुंह खोलने पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द होने का डर है। इसलिए, इनमें से बहुत सारेलोग जन स्वास्थ्य अभियान मुंबई के जरिए अपनी बात रख रहे हैं। अभियान की मुंबई कन्वीनर कामायनी बाली महाबल ने बताया कि मुंबई में तीन संक्रमितमें से एक की ही ट्रैवल हिस्ट्री मौजूद है। अब ज्यादातरसंक्रमण कॉन्टेक्ट से हो रहा है, जो चिंताजनक है। साथ ही, फ्रंट लाइन पर काम करने वाली नर्सें और डॉक्टर इसकी चपेट में आ रहे हैं। सार्वजनिक जगहों पर सभी लोग मास्क पहनकर निकलें बीएमसी कमिश्नर प्रवीण परदेशी ने सार्वजनिक जगहों पर सभी लोगों को मास्क पहनकर निकलने का आदेश जारी किया है। सड़कों, अस्पताल, ऑफिस, मार्केट जैसी जगहों से लेकरगाड़ी चलाते वक्तभी सभी को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। ये दुकान पर मिलने वाले मास्क या घर पर बनाए गए मास्क हो सकते हैं। मास्क नहीं पहनने वालों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार यहां लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। किट और मॉस्क न लगाएं, इससे मरीज डर जाएंगे मुंबई में जनस्वास्थ्य अभियान की कन्वीनर कामायनी बाली महाबल बताती हैं कि चिंता की बात यह है कि मेडिकल स्टाफ संक्रमित हो रहा है। जसलोक और वॉकहार्ट अस्पताल सील कर दिए गए हैं। अस्पताल में पूरी तरह से लापरवाई बरती गई। फ्रंटलाइन नर्सों के पास सेफ्टी किट (पीपीई) नहीं थी। वॉकहार्ट अस्पताल की एक नर्स के परिवार का उनके पास संदेश आया। इसमें ने लिखा कि वॉकहॉर्ट में दो संक्रमित केस थे, जिनका जनरल वॉर्ड में ही इलाज चल रहा था। इसी वॉर्ड में 70 साल के अन्य बुजुर्ग की कोरोना से मौत हो गई। 28 मार्च को यहां की दो नर्सों में कोरोनावायरस के लक्षण दिखाई देने लगे। परिवार का आरोप है कि नर्सों को बोला गया कि वह किट और मास्क का प्रयोग न करें इससे मरीजों के बीच डर बैठ जाएगा। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें बीएमसी के कमिश्नर प्रवीण परदेसी कह रहे हैं कि मुंबई में संक्रमित केस बढ़ने की वजह टेस्टिंग है। मुंबई में 10 लाख पर 816 लोगों की टेस्टिंग हुई, जबकि दिल्ली में सिर्फ 96 की जांच की गई।

संक्रमण से ठीक होने वाली 55 साल की महिला ने कहा- एक पल के लिए लगा था कि बीमारी के कारण बेटे ने छोड़ दिया है, डॉक्टरों ने समझाया तो हिम्मत आई (प्रणय चौहान) मध्यप्रदेश में कोरोना का सबसे ज्यादा संकट स्वच्छता में नंबर वन इंदौर में देखा जा रहा है। हर दिन यहां संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस बीच अच्छी खबर यह है कि कुछ मरीज ठीक होकर अपने घर लौट भी रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है55 साल की सकीना की। उन्होंनेकोरोना के साथ डायबिटीज की लड़ाई भी लड़ी। सकीना ने बताया, 'मैं पहले से ही डायबिटीज की पेशेंट हूं। हल्की सर्दी-खांसी हुई थी। कुछ दिन में बुखार और फिर निमोनिया हो गया। हॉस्पिटल में एडमिट करवाया।डॉक्टर के कहने पर कोरोना की जांच कराई, तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। बेटे ने यह बात मुझे नहीं बताई। इस बात से बहुत धक्का लगा।' सकीना ने कहा- परिवार में बेटा, बहू और दो छोटे बच्चे हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मुझसे काेई मिलने नहीं आता था, इस बात ने डरा दिया था। मुझसे कोई मिलने नहीं आता था, तो बुरा लगता था- सकीना सकीना ने बताया कि हम बुरी तरह से डर गए थे। लग रहा था पता नहीं अब क्या होगा, क्योंकि कोरोना के बारे में बहुत कुछ सुना था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मेरे बेटे-बहू ने कुछ दिन तक तो बताया ही नहीं कि मुझे क्या हुआ है। मेरे परिवार में बेटा, बहू और दो बच्चे हैंपर मुझसे काेई मिलने नहीं आता था। उनकी बहुत याद आती थी। लग रहा था कि बीमार होने की वजह से उन्होंने मुझे अकेला छोड़ दिया है। मुझे भरोसा था कि मैं ठीक हो जाऊंगी: सकीना उन्होंने कहा,'फिर मुझेडॉक्टर ने समझाया कि मुझे कोरोना हुआ है, इसलिए वे मिल नहीं सकते। जब जाकर आत्मविश्वास बढ़ा। शुगर के मरीज का इम्युनिटी सिस्टम 50% तक कम हो जाता है। लेकिन, मुझे भरोसा था कि मैं ठीक हो जाऊंगी। जब रिपोर्ट निगेटिव आई और जब पता चला कि अस्पताल से छुट्टी होने वाली है, तो मेरीखुशी का ठिकाना नहीं रहा।' आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें तस्वीर में 54 साल की सावित्री सांवरे और उनके बेटे संजय हैं। मां टाटपट्‌टी बाखल के संक्रमित लोगों की स्क्रीनिंग में जुटी हैं। मां-बेटे दोनों का एक साथ मिलना नहीं हो पा रहा था। मंगलवार को बेटे को पता चला कि मां पैदल घर जा रही हैं तो वे उन्हें घर छोड़ने के लिए अफसरों से अनुमति लेकर पहुंच गए। एक-दूसरे को आमने-सामने पाकर दोनों भावुक हो गए।

महिला डॉक्टर से पड़ोसी बोला- गेट आउट, बदसलूकी भी की; डॉक्टर ने कहा- मैं अपने फर्ज से पीछे नहीं हटूंगी देश में कोरोना संक्रमण के बीच मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों को फ्रंट लाइन वॉरियर कहा जाता है। पूरे देश ने इनके सम्मान में तालियां बजाने से लेकर दीये तक जलाए।लेकिन,गुजरात में एकमहिला डॉक्टर से बदसलूकी का मामला चर्चा में है। सूरत के सिविल अस्पताल में काम करने वालीडॉ. संजीवनी से उनके पड़ोसी चेतन मेहता और उसकी पत्नी भावना मेहता ने बदसलूकी की। उन्हें घर छोड़कर जाने के लिए भी धमकाया। डॉक्टर ने इसका वीडियो बनाकरपुलिस कमिश्नर से शिकायतकी है।डॉ. संजीवनी ने कहा-मैं अपना काम करती रहूंगी और फर्ज निभाने से कभी भी पीछे नहीं हटूंगी। डॉक्टर ने कहा- जब कोई जवाब नहीं दिया, तो पड़ोसी भड़क गए कुछ दिन पहले मैंने पुलिस को शिकायत कर कहा था कि पड़ोसी परेशान कर रहे हैं। एक ने मुझसे पूछा- तुम अस्पताल में काम करती हो। कहीं तुम्हें भी वायरस का संक्रमण तो नहीं हो गया है। मैंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। इस बात से वे लोग भड़क गए। रविवार को मैं घर पहुंची, तो पड़ोसी चेतन और उसकी पत्नी बाहर ही खड़े थे। मेरे घर में डॉगी है। उसे देखकर भावना भड़क गई। चिल्लाकर आस-पास के लोगों को इकठ्ठा कर लिया और बोली कि कुत्ता काट रहा है। अटैक कर रहा है। तभी चेतन ने मुझे गाली देनी शुरू कर दी और धक्का दे दिया। धमकी देते हुए कहा यह सब नहीं चलेगा। तुझे यहां रहना है कि नहीं। पुलिस बोली- अब ऐसा बर्ताव नहीं होगा इस दुर्व्यवहार के बाद डॉ. संजीवनी ने कहा-मैं कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हूं, क्या यह मेरी गलती है। उन्होंने पीएमओ को ट्वीट कर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।वहीं, अबपुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि अब उनके साथ कोई ऐसा व्यवहार नहीं करेगा। पड़ोसी ने डॉक्टर सेजाने के लिए कहा महिला डॉक्टर के साथ हुई बदसलूकी के वीडियो में भी पड़ोसी की धमकी मौजूद है।डॉक्टर केपड़ोसी चेतन ने उनसे कहा- गेट आउट। डॉक्टर है तो क्या हुआ?जानती नहीं मुझे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। मारपीट के और भी मामले सामने आए गुजरात में कुछ दिन पहले ही सिविल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. ओमकार के. सेपुलिस कर्मी ने मारपीट की थी। वे घर से ड्यूटी के लिएनिकले थे। इसी बीच पुलिसकर्मी ने उन्हें रोककर बदतमीजी की और फिर उनके साथ मारपीट की। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें डॉक्टर ने कहा- कुछ दिन पहले मैंने पुलिस से कहा था कि पड़ोसी परेशान कर रहे हैं। एक ने पूछा था- तुम अस्पताल में काम करती हो, कहीं कोरोना तो नहीं हो गया है।

लॉकडाउन में डाकिया अब डाक के साथ-साथ दवाइयां, सब्जी, फल, आटा, दाल की होम डिलीवरी भी करेगा; 5 हजार रु. तक कैश भी पहुंचाएगा (अनुभव अवस्थी)डाकिया अब डाक ही नहीं, बल्कि दवाइयां, सब्जी, फल, आटा, दाल और राशन की होम डिलीवरी भी करेगा। इसके लिए आपको पास के पोस्ट ऑफिस में जाकर पार्सल बुक कराना हाेगा। लाॅकडाउन में देशभर के 1.55 लाख पोस्ट ऑफिस से ये सुविधाएं आम लोगों को मुहैया कराई जा रही हैं। आप अपना पार्सल देश के किसी भी काेने में भेज सकते हैं। केंद्र सरकार ने राेज के उपयोग में आने वाले सामान की पार्सल के जरिये होम डिलीवरी का काम डाक विभाग काे सौंपा है। यदि आप संपूर्ण लाॅकडाउन के दौरान अपने किसी रिश्तेदार या परिचित को कोई भी जरूरी सामान भेजना चाहते हैं, तो इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। डाकिये को आधार कार्ड दिखाकर 500 से 5000 रुपए तक ले सकते हैं देशभर में दी जा रही इस सुविधा को लेकर जालंधर डिवीजन पोस्ट ऑफिस के सीनियर सुपरिंटेंडेंट नरेंद्र कुमार का कहना है कि पंजाब में कर्फ्यू के दौरान अभी मुंबई, बेंगलुरू, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई समेत पांच शहरों के लिए बुकिंग की जा रही है। सिर्फ यही नहीं, कर्फ्यू के दौरान जो लोग बैंक तक पैसे निकालने नहीं जा सकते हैं, उन्हें पोस्ट ऑफिस उनके घरों पर रुपए निकालने की सुविधा दे रहा है। अगर आपका अकाउंट आधार से लिंक है, तो डाकिये को आधार कार्ड दिखाकर 500 से 5000 रुपए तक ले सकते हैं। इसके लिए किसी भी बैंक में अकाउंट होना चाहिए। आधार मिलते ही बायोमीट्रिक से डाकिया वाजिब रकम निकालकर दे देगा। यह पैसा आपके अकाउंट से कट जाएगा। इस स्कीम से जालंधर में रोज करीब 200 लोगों को पैसा दिया जा रहा है। अब तक 900 से अधिक लोगों को उनके घरों पर रकम उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस स्कीम से गांव के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ हो रहा है। बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो फोन पर ले सकते हैं सुविधा का लाभ लॉकडाउन के चलते आप पोस्ट ऑफिस तक नहीं जा पा रहे हैं, तो अपने निकटतम पोस्ट ऑफिस को फोन भी कर सकते हैं। सूचना पर पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी आपके घर पहुंच जाएंगे। वहीं से ही आपको सभी सुविधाएं मिल जाएंगी। यदि आपको पैसों की जरूरत है, तो पैसे ले सकते हैं, यदि काेई सामान पार्सल करना है या कोई जानकारी लेनी है तो घर पर ही आपको सभी जानकारियां मिल जाएंगी। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें In the lockdown, the postman will now do postal as well as home delivery of medicines, vegetables, fruits, flour, pulses; 5 thousand rupees Will also send cash to

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कोरोनावायरस के मामलों पर स्टडी की, इसमें दावा- अमेरिका में जहां प्रदूषण ज्यादा, वहां मौतें अधिक (लीजा फ्रीडमैन)दुनियाभर से खबरें और तस्वीरें आ रही हैं कि कोरोनावायरस के फैलते संक्रमण से बचने के प्रयासों के बीचवायु प्रदूषण में कमी आई है। लेकिन,इससे जुड़ा एक और तथ्य सामनेआया है, जिसके मुताबिक जिन इलाकों मेंप्रदूषण ज्यादा था, वहां पर कोरोना से मौतें भी ज्यादा हुईं। जहां प्रदूषण कम मात्रा में था, वहां पर संक्रमण भी कम फैला और मौतों का आंकड़ा भी कम रहा। यह दावा अमेरिका की देशव्यापी स्टडी में किया गया है।हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने स्टडी के दौरान अमेरिका की 3080 काउंटी का विश्लेषण किया। यूनिवर्सिटी के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक,जिन इलाकों में प्रदूषित कणों (पीएम 2.5) का स्तर ज्यादा था, वहां मृत्यु दर भी ज्यादा रही। इस तरह की स्टडीदेश में पहली बार हुई। शोधकर्ताओं ने सांख्यिकीय गणना के आधार पर यह माना है कि प्रदूषण कणों की संख्या ज्यादा होने का असर कोरोना और अन्य बीमारियों से होने वाली मौतों पर पड़ा है। स्टडी के अनुसार,अगर मैनहट्‌टन अपने औसत प्रदूषण कणों को पिछले 20 साल में एक माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर भी कम कर देता तो शायद हमें 248 मौतें कम देखने को मिलती। इस शोध सेहेल्थ अफसरों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि मरीजों को वेंटिलेटर्स और रेस्पिरेटर्स जैसे संसाधन कैसे देने हैं। लंबी अवधि में प्रदूषण की मात्रा बढ़ना, कोरोना केखतरे को भी बढ़ाएगा हार्वर्ड डेटा साइंस इनिशिएटिव के डायरेक्टर और स्टडी के लेखक फ्रांसेस्का डोमिनिकी के मुताबिक,कई काउंटी में पीएम 2.5 का स्तर 1 क्यूबिक मीटर में 13 माइक्रोग्राम है। यह अमेरिकी औसत 8.4 से बहुत अधिक है। स्टडी के नतीजों से स्पष्ट होता है कि लंबी अवधि में प्रदूषण की मात्रा बढ़ना, कोरोना संबधी खतरे को भी बढ़ाएगा। उदाहरण के लिए कोई शख्स 15-20 साल तक ज्यादा प्रदूषण झेलता रहा है तो कम प्रदूषित जगह पर रहने वाले की तुलना में उसकी कोरोना से मौत की संभावना 15% ज्यादा रहेगी। यूरोप के सबसे प्रदूषित सौ शहरों में से 24 शहर इटली इटली में कोरोना से ज्यादा मौतों को भी प्रदूषण से जोड़कर देखा जा रहा है। स्विस एयर मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म आईक्यूएयर के मुताबिक, यूरोप के सबसे प्रदूषित सौ शहरों में से 24 शहर इटली के हैं। शोधकर्ताओं का दावा है कि ऐसे में वायरस संक्रमण और मृत्यु दर बढ़ने की वजह प्रदूषित हवा भी हो सकती है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें इटली: नेपल्स में लॉकडाउन है पर यह नजारा।

मरीज और क्वारैंटाइन लोगों से हर दिन 100 किलो कचरा निकल रहा, छह लोगों की टीम इसे 1 हजार डिग्री पर जलाकर खत्म कर रही (अमिताभ अरुण दुबे) इसवक्त पूरा देश कोरोनावायरस के संक्रमण की दहशत से जूझ रहा है। दूसरी तरफ संभवत: यह पहली खबर और तस्वीर है,जिसमें हम बता रहे हैं कि कोरोना के मरीजों और क्वारैंटाइन लोगों से जो कुछ भी संक्रमित कचरा (मेडिकल वेस्ट) निकल रहा है, उसका क्या किया जा रहा है। जिस तरह डाक्टर-नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम जान जोखिम में डालकर कोरोना मरीजों का इलाज कर रही है, उससे कहीं ज्यादा जोखिम छह लोगों की उस टीम को है, जो इनका संक्रमित कचरा उठा रही है।उसे इकट्ठा कर रोजाना पूरी सतर्कता से नष्ट कर रही है। राजधानी के एम्स में कोरोना मरीजों औरसरकारी क्वारैंटाइन सेंटरों के अलावा होम आइसोलेशन वाले कुछ लोग भी अपना कचरा अलग कर रहे हैं। फिलहाल हर दिन करीब 100 किलो कचरा निकल रहा है। इसे यही टीम एक खास भट्ठी में 1000 डिग्री तापमान पर जलाकर नष्ट कर रही है और सिर्फ राख ही बच रही है। यह दरअसल मेडिकल वेस्ट ही है, लेकिन इस वक्त कोरोना का वेस्ट सबसे हाई रिस्क है। इसे नष्ट करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने एक खास गाइडलाइंस भी बनाई है, जिसके अनुरूप ही इसको डिस्पोज किया जाता है। दरअसल, कोरोना कचरा इतना सेंसेटिव माना जा रहा है कि इसके कलेक्शन प्वाइंट से लेकर प्रोसेसिंग प्लांट में अगर किसी तरह की छोटी सी चूक भी हो जाए, तो शहर का बड़ा हिस्सा संक्रमण की जद में आ सकता है। लिहाजा इसके लिए खास तरह के प्रोटोकॉल भी बनाए गए हैं। भास्कर पहली बार इस पूरी प्रक्रिया की आंखों देखी आपको बता रहा है। कलेक्शन प्वाइंट तक कचरा लेने केवल जाता है ड्राइवर शहर में गोपनीय जगह पर बनाए गए कलेक्शन प्वाइंट से इन सभी पीले बैग को प्रोसेसिंग प्लांट तक लाने के लिए एक विशेष गाड़ी जाती है। इस गाड़ी को दिन में तीन से चार बार सैनिटाइज किया जाता है। गाड़ी में पूरे प्रोटेक्शन किट पहने हुए केवल ड्रायवर ही होता है। यही गाड़ी सीधे एम्स अस्पताल तक जाकर वहां के कोरोना वेस्ट को कलेक्ट करती है। अस्पताल का कोरोना वेस्ट शहर में कलेक्शन प्वाइंट पर नहीं लाया जाता है। इसमें संक्रमण का खतरा कई गुना तक होता है। ड्रायवर इस कचरे को लेने जिस पीपीई किट को पहनकर जाता है, प्लांट पर आने के बाद उसे फौरन किट उतराना होता है। ये किट भी अलग पीले बैग में अलग रखी जाती है। गाड़ी और ड्रायवर को अच्छी तरह सैनिटाइज किया जाता है। एक हजार डिग्री पर कचरे को जलातीहै पांच-छह लोगों की टीम शहर से दूर चाक चौबंद सुरक्षा के बीच सिलतरा के प्रोसेसिंग प्लांट तक कोरोना कचरे को पहुंचाने के बाद ड्रायवर का काम खत्म हो जाता है। इसके बाद प्रोसेसिंग टीम इसकी प्रक्रिया शुरू करती है। प्रोसेसिंग के लिए पांच से छह लोगों की एक अलग टीम है। इस टीम के सदस्यों को भी प्रोटेक्शन किट पहनना पड़ता है। इसके बाद दिनभर कलेक्ट होकर आया कोरोना कूड़ा तीन से चार बार बैग के ऊपर से सैनिटाइज किया जाता है। फिर इस कचरे को वेट मशीन में डाला जाता है। जहां दिन के कचरे का वजन किया जाता है। फिर ट्रालियों से इसे बिजली की भट्टी तक पहुंचाया जाता है। जहां एक हजार डिग्री पर इसे प्रोटोकॉल के मुताबिक, जलाकर खत्म कर दिया जाता है। ये इतना अधिक तापमान होता है कि वायरस पूरी तरह नष्ट हो जाता है, इसलिए राख में किसी तरह का जोखिम नहीं रहता है। प्रोसेसिंग टीम की किट भीहर दिन जला दी जाती है इस काम को करने वाली प्रोसेसिंग टीम के सभी सदस्यों की प्रोटेक्शन किट को भी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सैनिटाइज कर जला दिया जाता है। हर दिन टीम को नई किट पहनी पड़ती है। किट की किल्लत न हो इसके लिए इस काम को करने वाली एजेंसी ने पूरा स्टॉक भी रखा है। रायपुर के अलावा दुर्ग, भिलाई जैसे आसपास के शहरों से भी आने वाला कोरोना वेस्ट यही प्रोसेस किया जाता है। इस काम को करने वाली टीम का रूटीन हेल्थ चैकअप भी होता हैताकि अगर किसी वजह से संक्रमण हो तो वक्त रहते उसे ठीक किया जा सके। इतना ही नहीं, पूरी टीम का एक ट्रैकिंग सिस्टम भी बनाया गया है। वो कहां जाते हैं, किन लोगों के बीच रहते हैं, इसको भी रूटीन में बारीकी से मॉनिटर किया जाता है। प्लांट से निकलने से पहले इनकी गाड़ियों और इनको अच्छी तरह सैनिटाइज भी करते हैं। प्रदेश में ये पूरा काम प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड की देखरेख में हो रहा है। एहतियातन इस पूरे काम को करने वाली टीम के सदस्यों के नाम और व्यक्तिगत सूचनाएं भास्कर इस रिपोर्ट में गोपनीय ही रख रहा है। शहर में एक विशेष प्वाइंट से कलेक्ट होता है कचरा कोरोना संदिग्धों और क्वारैंटाइन सेंटर से पीले बैग में कोरोना वेस्ट को शहर में एक स्थान पर हर दिन डंप किया जाता है। सुरक्षा कारणों से उस विशेष स्थान का जिक्र यहां नहीं किया जा रहा है। इसमें कोरोना संदिग्ध के हाथों से गुजरा हर तरह का कचरा होता है, इसमें उसके द्वारा इस्तेमाल किए खाद्य पदार्थों जैसे चिप्स बिस्किट के खाली रैपर तक होते हैं। इसके अलावा टीशू पेपर, मास्क, कॉटन, शेविंग ब्लेड, सौंदर्य प्रसाधन, नाखून वगैरह भी इसी पीले बैग में रखा जाता है। इस बैग को अच्छी तरह पैक करने की जिम्मेदारी भी संदिग्ध पर ही होती है। इसके बाद डोर टू डोर कलेक्शन वाली टीम इस बैग को अलग से जाकर कलेक्ट कर कलेक्शन प्वाइंट पर लाकर डंप करती है। कोरोना कचरे की प्रोसेसिंग हाई रिस्क टास्क छत्तीसगढ़कीयूनिट हेड-प्रोसेसिंग एजेंसीमलय सेनगुप्ता ने बताया किकोरोना कचरे की प्रोसेसिंग हाई रिस्क टास्क है। इसमें बहुत सावधानियों की जरूरत है। संदिग्धों की तादाद बढ़ने पर ये मात्रा और भी बढ़ सकती है। पेशेंट जो ठीक होकर घर पहुंच गए हैं, उनका कचरा भी यही टीम डिस्पोज कर रही है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें कोरोना वेस्ट को प्रोसेस करने वाली टीम। मेडिकल वेस्ट प्रोसेसिंग एजेंसी के यूनिट हेड मलय सेनगुप्ता ने बताया कि कोरोना कचरे की प्रोसेसिंग हाई रिस्क टास्क है। इसमें बहुत सावधानियों की जरूरत है।

इटली के रास्ते पर भारत, मौत और केस की रफ्तार एक जैसी, समय में बस एक महीने पीछे नई दिल्ली. भारत में कोरोनावायरस के केस और मौतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे देश में वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ गया है, इसी को कोरोना का थर्ड फेज भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अब थर्ड फेज की दहलीज पर खड़ा है। इसकी असल तस्वीर लॉकडाउन खत्म होने यानी 14 अप्रैल से पहले साफ हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि भारत में कोरोना का ग्राफ इटली जैसा ही दिख रहा है। अंतर बस समय का है। कोरोनावायरस के मामलों और मौतों के लिहाज से देखें तो भारत तकरीबन इटली के रास्ते पर ही बढ़ रहा है। बस हम समय में उससे एक महीने पीछे हैं। वर्ल्ड मीटर के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल तक भारत में कोरोना के 1998 केस आए थे और 58 मौतें हुई थीं। एक महीने पीछे यानी एक मार्च के इटली के आंकड़े देखें तो वहां इस तारीख तक कोरोना के 1577 केस आए थे, जबकि मौतें 41 हुई थीं। सोमवार यानी छह अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस के 4778 केस सामने आ चुके हैं, जबकि 136 मौतें हुई हैं। अब इससे एक महीने पीछे चलें, यानी इटली में 6 मार्च तक का कोरोना ग्राफ देखें तो वहां 4636 केस आए थे, जबकि 197 मौतें हुई थीं। रोजाना की स्थिति: भारत में अब रोज उतने ही केस आ रहे, जितने एक महीने पहले रोज इटली में आ रहे थे भारत और इटली में रोजाना के केस और मौतों की संख्या भी लगभग एक जैसी ही है। यहां भी बस अंतर समय का है। एक महीने पहले इटली में रोजाना भारत जितने ही केस आ रहे थे और मौतें भी लगभग बराबर हो रही थीं। इटली में एक मार्च को 573 केस आए थे और 12 मौतें हुई थीं। एक महीने बाद भारत में एक अप्रैल को 601 केस आए और 23 मौतें हुईं। रोजाना की मृत्युदर: भारत में कोरोना से रोज की औसत मृत्युदर भी एक महीने पहले के इटली जैसे ही है कोरोनावायरस से भारत और इटली में रोजाना की मृत्युदर भी लगभग एक जैसी है। दोनों देशों के बीच अंतर सिर्फ समय का है। आंकड़ों पर गौर पर करें तो पता चलता है कि एक महीने पहले इटली में कोरोना से रोजाना की औसत मृत्युदर तकरीबन भारत के मौजूदा हालात जैसे ही थे। 1 मार्च को इटली में कोरोना से मृत्युदर 33.01 फीसदी थी। एक महीने बाद 1 अप्रैल को भारत में कोरोना से मृत्यदर 28.16 फीसदी थी। भारत में अब तक कोरोनावायरस के केस कम होने के पीछे की बड़ी वजहें 1- कम टेस्टिंग होना: भारत में अभी तक सिर्फ 85 हजार लोगों का ही कोरोनावायरस टेस्ट हुआ है, यानी एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो रहा है 130 करोड़ आबादी वाले देश में जिस तरह कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग और सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं, वो नाकाफी हैं। भारत में अब तक करीब 85 हजार टेस्ट हो पाए हैं। कुछ राज्यों में अबभी रोजाना-250 से 500 तक टेस्ट ही किया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति के कई टेस्ट होते हैं। इसलिए भी भारत में कोरोना के केस कम आए हैं।भारत में अभी एक लाख की आबादी पर महज 6.5 लोगों की ही टेस्ट हो सका है। वहीं, दुनिया के अन्य देशों इसकी स्थिति भारत से उलट है। दक्षिण कोरिया की आबादी महज 5.1 करोड़ है। वहां अब तक 2.5 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। एक अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक हर एक लाख की आबादी पर बहरीन ने 20,075 लोगों का, दक्षिण कोरिया ने 8,222 का, इटली ने 8,385 का, ऑस्ट्रिया ने 6,203 का, ब्रिटेन ने 2,109 का, अमेरिका ने 447 का, जापान ने 257 लोगों का कोरोना टेस्ट किया है। चीन ने मार्च के अंत तक कुल 3.20 लाख लोगों का टेस्ट किया था। 2- लॉकडाउन जल्द लागू होना: इस वजह से कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, इसीलिए अभी रोजाना औसतन 500 केस ही सामने आ रहे हैं डब्ल्यूएएचओ काकहना है कि भारत सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन लागू किया।इसीलिए देश में कोरोना के केस कम आ रहे हैं। भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार चीन, अमेरिका ओर यूरोपीय देशों के तुलना में काफी धीमी है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन तक देश में 374 केस थे। उसके बाद 8 दिनों में करीब 820 केस सामने आए हैं। यानी एक दिन में औसतन 100 केस ही सामने आए। 31 मार्च को 1635 केस थे। 6 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 4778 हो गई। यानी 6 दिन में 3145 केस आएहैं। देश में अब औसतन एक दिन में 500 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि भारत में कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, अभी यह तीसरे स्टेज में नहीं पहुंच पाया है। जिसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का फेज भी कहा जाता है। जबकि अमेरिका में 10 दिन में ही कोरोनावायरस के केस एक हजार से 20 हजार तक पहुंच गए थे। 3- बीसीजी का टीका लगना: भारत समेत दुनिया के जिन देशों में लंबे समय से बीसीजी का टीका लग रहा, वहां लोगों में कोरोनावायरस का खतरा कम है भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार कम होने के पीछे बीसीजी टीके को भी खास बताया जा रहा है। दरअसल, भारत में 72 साल से बीसीजी के जिस टीके का इस्तेमाल हो रहा है, उसे दुनिया अब कोरोना से लड़ने में मददगार मान रही है। न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका और इटली जैसे जिन देशों में बीसीजी वैक्सीनेशन की पॉलिसी नहीं है, वहां कोरोना के मामले भी ज्यादा सामने आ रहे हैं और मौतें भी ज्यादा हो रही हैं। वहीं, जापान और ब्राजील जैसे देशों में इटली और अमेरिका के मुकाबले मौतें फिलहाल कम हैं। बीसीजी का पूरा नाम है, बेसिलस कामेट गुएरिन। यह टीबी और सांस से जुड़ी बीमारियों को राेकने वाला टीका है। बीसीजी को जन्म के बाद से छह महीने के बीच लगाया जाता है। मेडिकल साइंस की नजर में बीसीजी का वैक्सीन बैक्टीरिया से मुकाबले के लिए रोग प्रतिरोधक शक्ति देता है। इससे शरीर को इम्यूनिटी मिलती है, जिससे वह रोगाणुओं का हमला झेल पाता है। हालांकि, कोरोना एक वायरस है, न कि बैक्टीरिया। जो थ्योरी फेल हो गई- गर्म मौसम की वजह से: ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना ज्यादा फैला, इसलिए लोग खुद ही सोचने लगे कि गर्मी में यह वायरस नहीं फैलता, एक्सपर्ट्स अभी किसी नतीजे पर नहीं कोरोनावायरस अभी तक सबसे ज्यादा ठंडे मौसम वाले देशों में फैला है और इन्हीं देशों में सबसे ज्यादा मौतें भी हुईं। इसलिए लोग खुद-ब-खुद मानने लगे कि कोरोना गर्म जलवायु वाले देशों में कम फैलता है। सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश भी बहुत शेयर किए गए। जबकि यह थ्योरी फेल हो चुकी है, क्योेंकि ब्राजील और खाड़ी के कुछ देशों में अब कोरोना तेजी से फैल रहा है। वो भी गर्मी के बावजूद। इसके अलावा टाइफाइड गर्मी के मौसम में चरम पर होता है। खसरे के केस गर्म इलाकों में गर्मीके मौसम में कम हो जाते हैं, वहीं ट्रॉपिकल(गर्म) इलाकों में शुष्क मौसम में खसरे के केस चरम पर होते हैं। शायद इसलिए ही कहा जा रहा था कि कोविड-19 पर भी गर्म मौसम का असर होगा। भारत में गर्मी में कोरोना खत्म हो जाएगा। लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसको लेकर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक भी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच हैं। इसके बारे में ब्रिटिश डॉक्टर सारा जार्विस कहती हैं कि 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी, जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन ये तापमान बदलने की वजह से हुआ या किसी और अन्य वजह से ये बताना मुश्किल है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Italy India Coronavirus | Italy Coronavirus Death Toll Latest Vs India COVID-19 Cases Updates: Reasons Why India Might Not Look Like Italy

विदेश से लौटे लोगों ने पैरासिटेमॉल से बुखार दबाया, राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 193, अब एप से नजर (पुणे से मंगेश फल्ले/मुंबई से चंद्रकांत शिंदे).देश में महाराष्ट्र में सबसे बुरे हालात हैं। यहां मरीजों की संख्या 193 हो गई है। सात की मौत हुई है। 323 अस्पतालों में हैं। राज्य में 17,295 लोग होम क्वारैंटाइन और 5928 संस्थाओं में क्वारैंटाइन में हैं। इस बीच विदेश यात्रा से लौटने वालों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अमेरिका, दुबई, लंदन, फ्रांस, जर्मनी से आए कई लोगों ने बुखार के लक्षणों को दबाने के लिए पैरासिटेमॉल का इस्तेमाल किया और मुंबई एयरपोर्ट पर बुखार कीजांच से बच निकले। इधर कुछ लोगों को होम क्वारैंटाइन के बावजूद बाहर घूमते देखा गया है। इससे निपटने के लिए पुणे प्रशासन ने ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ आधारित ऐप बनवाया है। 1276 लोगों पर 152 पुलिस टीमें नजर रख रही हैं। संदिग्ध लोगों को घड़ी के सामने खड़े होकर सेल्फी लेकर ऐप पर अपलोड करने का कहा गया है। उस समय की उसकी लोकेशन भी ऐप पर दर्ज हो जाती है। ऐसा दिन में दो बार करवाया जा रहा है। ऐसा न करने पर पुलिस को तत्काल उसकी अनुपस्थिति पता चलती है। इस ऐप के इस्तेमाल के अच्छे नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली: चीन की स्थिति के आधार पर तैयारी की, रोज एक हजार मरीजों की भर्ती तक का प्लान तैयारी के लिए दिल्ली सरकार की बनाई कमेटी के प्रमुख डॉ.एस.के.सरीन ने बताया कि चीन के पहले 1000 मरीजों की स्थिति के आधार पर तैयारी की है। वहां 1000 मरीजों में 140 को भर्ती होना पड़ा। 50 को आईसीयू और 23 को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। एक मरीज 4 से 20 दिन भर्ती रहा। दिल्ली ने हर दिन 500 मरीज और हर दिन 1000 को भर्ती की जरूरत का प्लान बनाया है। निजी अस्पतालों की भी मदद लेनी होगी। एक दिन में 100 मरीज आते हैं तो 14 को भर्ती करना पड़ेगा और इसके लिए पांच आईसीयू बेड और करीब 2.3 वेंटिलेटर की जरूरत होगी। इसके लिए लोक नायक और राजीव गांधी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में आईसीयू के 50-50 बेड और आइसोलेशन के 200-200 बेड तैयार हैं। जरूरत पड़ने पर लोक नायक में एक हजार और राजीव गांधी में 400 बेड हो सकते हैं। जीटीबी, डीडीयू और अंबेडकर अस्पताल में भी व्यवस्था हैं। 26 एंबुलेंस अलग रखी गई हैं। जरूरत पढ़ने पर 90 और एंबुलेंस हैं। रोज 3000 जांच की तैयारी है। 10 अप्रैल तक लॉकडाउन रहा तो संख्या बढ़ने के क्रम में कमी आने लगेगी। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें मुंबई में लॉकडाउन के दौरान बाजारों को सेनिटाइज किया जा रहा है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के आरोपी मिशेल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई, कहा- जज साहब, देश में कोरोना फैल रहा है, मुझे जमानत दें नई दिल्ली (पवन कुमार).दुनिया भर में तेजी से फैल रहे कोरोनावायरस के संक्रमण का डर अब जेल में बंद कैदियों को भी सताने लगा है। 2666 करोड़ के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले के आरोपी 59 वर्षीय क्रिश्चियन मिशेल ने कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह जेल से बाहर ऐसी जगह पर रहना चाहता है, जहां कोरोना का खतरा कम हो और वह खुद को इस बीमारी से संक्रमित होने से बचा सके। अधिक उम्र और जेल में कैदियों की भीड़ की वजह से उसे संक्रमण का खतरा ज्यादा है। जेल में कैदियों के बीच सोशल डिस्टेन्स का नियम भी सही से लागू नहीं हो रहा। मिशेल ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले का हवाला भी दिया है, जिसमेंसुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में कैदियों की अधिक भीड़ के कारण कोरोना के संक्रमण के संभावित खतरे पर चिंता व्यक्त की थी और निर्देश जारी किया था कि सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और केंद्र सरकार जेल में बंद 7 साल तक कि सजा वाले अपराधियों को पैरोल व जमानत पर बाहर निकालने पर विचार करे। मिशेल काे2018 में दुबई से गिरफ्तार किया गया था 2666 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने क्रिश्चियन मिशेल को दिसंबर 2018 में दुबई से गिरफ्तार किया था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने उसके साथ 2 अन्य आरोपियों गुइडो हैसचे और कार्लो गेरोसा को भी गिरफ्तार किया था। मिशेल पर अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से 225 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें क्रिश्चियन मिशेल- फाइल।

निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को फांसी पर लटकाया गया; 7 साल, 3 महीने और 4 दिन बाद इंसाफ नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले आज अपने अंजाम पर पहुंच गए। सात साल, तीन महीने और चार दिन के बाद मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को फांसी पर लटका दिया गया। इसी के साथ 20 मार्च 2020 की सुबह 5.30 बजे का वक्त तारीख में निर्भया को इंसाफ मिलने की घड़ी के तौर पर दर्ज हो गया। फांसी से पहले पवन, मुकेश, विनय और अक्षय को नाश्ते-पानी की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इनकार दिया था। विनय रोने लग गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ की जेल नंबर तीन में बने फांसी घर में लाया गया। जहां पवन जल्लाद ने उन्हें फांसी के फंदे से लटका दिया। आखिरी कोशिशें: 24 घंटे में 8 याचिकाएं, सभी खारिज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को पवन गुप्ता की और अक्षय ठाकुर की दूसरी दया याचिका नामंजूर कर दी। अक्षय ने राष्ट्रपति की ओर से दूसरी दया याचिका ठुकराने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, अदालत ने इसे भी खारिज किया। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। मुकेश ने दावा किया था कि गैंगरेप के वक्त वह दिल्ली में ही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में ही दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो गई। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 दोषियों की फांसी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी पर रोक की याचिका खारिज की। पवन दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यहां भी याचिका खारिज कर दी गई। इंसाफ पर आशा मुस्कुराईं आशा देवी ने कहा, "7 साल की लंबी लड़ाई के बाद अब बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। भरोसा है कि दोषियों को फांसी होगी। देश की बच्चियों, पूरे देश को इंसाफ मिला। आज का दिन देश की बच्चियों के नाम, निर्भया के नाम। आज का दिन निर्भया दिवस के तौर पर याद किया जाए।" दुष्कर्मियों के वकील का निर्लज्ज बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने पर एपी सिंह ने मीडिया वालों को फटकार लगाई। उन्होंने रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा- एक मां के लिए आप सात साल से नाचते घूम रहे हो। यह मां नहीं है क्या। क्या आठ साल से कम उम्र का कोई विक्टिम है। चोर की मां की बात है तो फिर उस कारण पर जाओ कि रात 12.30 बजे तक क्यों नहीं पता था कि बेटी कहां है। यह बात छोड़ दीजिए। फिर बातें बढ़ेंगी। दुष्कर्मियों के वकील की दलीलों पर तल्ख टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट: आप मुवक्किल के नाबालिग होने के दस्तावेज बार-बार पेश कर रहे हैं। यह दस्तावेज इस अदालत में भी रखे गए। आप जो आधार बता रहे हैं, उन पर पहले ही बहस हो चुकी है। दया याचिका को चैलेंज करने का क्या आधार है। दिल्ली हाईकोर्ट: अब समय आ गया है, जब आपके मुवक्किल भगवान से मिलेंगे। समय बर्बाद मत कीजिए। अगर आप महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बता सकते, तो हम आखिरी वक्त में आपकी मदद नहीं कर सकते। आपके पास 4-5 घंटे हैं। अगर आपके पास कोई तथ्य है, तो सीधे उस पर आइए। दोषियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब अंजाम तक पहुंच रहा है। हम फांसी पर रोक नहीं लगा सकते। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Nirbhaya Rapist Hanging Tihar Jail Live | Nirbhaya Delhi Gang Rape Murder Case Convicts Tihar Jail Latest News and Updates

निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को फांसी पर लटकाया गया; 7 साल, 3 महीने और 4 दिन बाद इंसाफ नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले आज अपने अंजाम पर पहुंच गए। सात साल, तीन महीने और चार दिन के बाद मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को फांसी पर लटका दिया गया। इसी के साथ 20 मार्च 2020 की सुबह 5.30 बजे का वक्त तारीख में निर्भया को इंसाफ मिलने की घड़ी के तौर पर दर्ज हो गया। फांसी से पहले पवन, मुकेश, विनय और अक्षय को नाश्ते-पानी की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इनकार दिया था। विनय रोने लग गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ की जेल नंबर तीन में बने फांसी घर में लाया गया। जहां पवन जल्लाद ने उन्हें फांसी के फंदे से लटका दिया। आखिरी कोशिशें: 24 घंटे में 8 याचिकाएं, सभी खारिज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को पवन गुप्ता की और अक्षय ठाकुर की दूसरी दया याचिका नामंजूर कर दी। अक्षय ने राष्ट्रपति की ओर से दूसरी दया याचिका ठुकराने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, अदालत ने इसे भी खारिज किया। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। मुकेश ने दावा किया था कि गैंगरेप के वक्त वह दिल्ली में ही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में ही दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो गई। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 दोषियों की फांसी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी पर रोक की याचिका खारिज की। पवन दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, यहां भी याचिका खारिज कर दी गई। इंसाफ पर आशा मुस्कुराईं आशा देवी ने कहा, "7 साल की लंबी लड़ाई के बाद अब बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। भरोसा है कि दोषियों को फांसी होगी। देश की बच्चियों, पूरे देश को इंसाफ मिला। आज का दिन देश की बच्चियों के नाम, निर्भया के नाम। आज का दिन निर्भया दिवस के तौर पर याद किया जाए।" दुष्कर्मियों के वकील का निर्लज्ज बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने पर एपी सिंह ने मीडिया वालों को फटकार लगाई। उन्होंने रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा- एक मां के लिए आप सात साल से नाचते घूम रहे हो। यह मां नहीं है क्या। क्या आठ साल से कम उम्र का कोई विक्टिम है। चोर की मां की बात है तो फिर उस कारण पर जाओ कि रात 12.30 बजे तक क्यों नहीं पता था कि बेटी कहां है। यह बात छोड़ दीजिए। फिर बातें बढ़ेंगी। दुष्कर्मियों के वकील की दलीलों पर तल्ख टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट: आप मुवक्किल के नाबालिग होने के दस्तावेज बार-बार पेश कर रहे हैं। यह दस्तावेज इस अदालत में भी रखे गए। आप जो आधार बता रहे हैं, उन पर पहले ही बहस हो चुकी है। दया याचिका को चैलेंज करने का क्या आधार है। दिल्ली हाईकोर्ट: अब समय आ गया है, जब आपके मुवक्किल भगवान से मिलेंगे। समय बर्बाद मत कीजिए। अगर आप महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बता सकते, तो हम आखिरी वक्त में आपकी मदद नहीं कर सकते। आपके पास 4-5 घंटे हैं। अगर आपके पास कोई तथ्य है, तो सीधे उस पर आइए। दोषियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब अंजाम तक पहुंच रहा है। हम फांसी पर रोक नहीं लगा सकते। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Nirbhaya Rapist Hanging Tihar Jail Live | Nirbhaya Delhi Gang Rape Murder Case Convicts Tihar Jail Latest News and Updates

सरकार का तीन होटलों 192 कमरे क्वारैंटाइन सुविधा के लिए रखने का आदेश, एक कमरे के लिए हर दिन देने होंगे 3100 रु. नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित तीन होटलों को कुल 182 कमरे क्वारैंटाइन सुविधा के लिए रखने का आदेश दिया है। इनमें विदेश से आने वाले संक्रमण से संदिग्ध लोगों को रखा जाएगा। नई दिल्ली की मजिस्ट्रेट तन्वी गर्ग ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आदेश दिल्ली महामारी बीमारी, कोविड-19 अधिनियम के तहत जारी किया गया है। क्वारैंटाइन सुविधा के लिए दिल्ली के आईबिस होटल के 92 कमरे, लेमन ट्री के 54 कमरे और रेड फॉक्स होटल के36 कमरे लिए जाएंगे। एक कमरे का टैक्स समेत हर दिन का किराया 3,100 रु. होगा।होटल आइसोलेट किए जाने वालों को नाश्ता, दिन और रात का भोजन, दो बोतल मिनरल वाटर, चाय, कॉफी देगा। वाईफाई और टीवी की सुविधा भी होटल की ओर से ही दी जाएगी। होटल के सेक्युरिटी गार्ड आइसोलेशन में रहने वाले पर नजर रखेंगे होटलों कोसुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि आइसोलेट किए जाने वाले लोगों के कपड़े दूसरे लोगों के कपड़े के साथ न मिलें। सभी लोगों को डिस्पोजेबल प्लेट या डिब्बोंमें खाना दिया जाएगा। खाने के बाद इन्हें बायो-मेडिकल वेस्ट हटाने केप्रोटकॉल के तहत नष्ट कियाजाएगा। होटल के सेक्युरिटी गार्ड नजर रखेंगे कि लोग आइसोलेशन के लिए तय स्थान से बाहर न निकलें। होटल प्रबंधन आइसोलेट किए गए लोगों की गतिविधियों पर अपने कंट्रोल रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों से नजर रखेगा। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें दिल्ली के आईबिस, लेमन ट्री और रेड फॉक्स होटल में क्वारैंटाइन सुविधा बनाई जाएगी।- फाइल फोटो

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