(नीरज आर्या) दिल्ली में कोरोना वायरस के शिकार लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इस सबके बाद भी लोग लाॅकडाउन के नियमों का ठीक से पालन नहीं कर रहे। इन लोगों के खिलाफ पुलिस लगातार मुकदमे तो दर्ज कर रही है, किंतु ऐसे मामले में कोई सख्त कानूनी प्रावधान नहीं होने से लोगों पर इसका ज्यादा असर नहीं हो रहा।
आज हालात ऐसे बन चुके हैं कानून अपने हाथ में लेने वाले लोगों को पुलिस थाने भी ले जाने से बच रह है। संक्रमण फैलने और सोशल डिस्टेसिंग को ध्यान में रख मौके पर ही आरोपियों के खिलाफ कागजी कार्रवाई पूरी कर छोड़ा जा रहा है। पहले ऐसा नहीं था। लॉकडाउन शुरु होने से दस अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आईपीसी की धारा 188 के तहत कुल 6043 मुकदमे दर्ज कर चुकी है।
इस कानून के तहत अगर आरोपी कोर्ट में दोषी साबित होता है तो उसे कम से कम एक महीने की जेल या दो सौ रुपए जुर्माना या फिर दोनों ही सजा दी जा सकती हैं। इन दिनों जो लोग पुलिस को पार्क में घूमते मिल रहे हैं, बिना मास्क लगाए नजर आ रहे हैं। उनपर केस दर्ज हो रहा है।
कुछ ऐसे मामले जिनमें पुलिस ने आरोपी को लॉकडाउन तोड़ने के लिए पहले पकड़ा, फिर छोड़ा
केस- 1 :पहला मामला, आरके पुरम इलाके में रहने वाला आनंद प्राइवेट नौकरी करता है। वह अपने दो दोस्तों के साथ कार से जा रहा था, तभी रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। उससे सड़क पर आने की वजह पूछी गई, जिसने कहा वह लोगों के लिए खाने पीने का इंतजाम करने जा रहा है, जो लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुए हैं। इसके जवाब से पुलिस संतुष्ट नहीं हुई और उसने इस युवक का ड्राइविंग लाइसेंस कब्जे में ले लिया। मौके पर ही उसके खिलाफ कागजी कानूनी कार्रवाई कर उसे छोड़ दिया।
केस-2 :दूसरा मामला, सफदरजंग एंक्लेव इलाके में एक मदर डेयरी संचालक को पुलिस कई बार हिदायत दे चुकी थी कि वह सोशल डिस्टेसिंग के नियमों को फॉलो करवाए, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। शुक्रवार शाम इस डेयरी पर दूध लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी पुलिस ने देखी। तभी वहां दो युवक स्कूटी पर दूध लेने के लिए पहुंचे, जिन्होंने मुंह पर मॉस्क नहीं लगा रखा था। इस पर पुलिस ने मदर डेयरी संचालक और दोनों युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई पूरी की। बाद में सबको छोड़ दिया गया।
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