सोमवार को आए भूकंप का केंद्र नई दिल्ली से 12 किमी उत्तर वजीराबाद और सोनिया विहार के बीच में रहा। रविवार को भी इसी के आसपास का केंद्र था। भारतीय मौसम विभाग के भूकंप केंद्र निदेशक डॉ. जेएल गौतम का कहना है कि दिल्ली में केंद्र होना या लगातार दो दिन भूकंप आना कोई विशेष बात नहीं है। दोनो दिन के भूकंप में कोई संबंध भी नहीं है। डॉ. जे.एल गौतम बताते हैं कि चौबीस घंटे में दूसरी बार क्या, 10-20 बार भी आ सकता है। ये तो कम है। महाराष्ट्र में पालघर में नवंबर, 2018 से 2019 के बीच कई बार भूकंप के झटके आए और केंद्र भी वही रहा।
24 गुना कम ताकत था यह भूकंप
डॉ. जेएल गौतम ने बताया कि किसी बड़ी हलचल का पूर्वानुमान नहीं लगा सकतें। दो भूकंप आ गए तो कोई बड़ा कुछ कुछ होना है या कोई बड़ा भूकंप आएगा, इससे संबंध नहीं जोड़ सकते। धरती कम हिलने की जहां तक बात है तो बता दें कि रिक्टर स्केल पर शक्ति सिर्फ 1 कम आंकी जाती है तो 32 गुना ताकत कम रहती है। रविवार को रिक्टर स्केल पर 3.5 शक्ति मापी गई थी और सोमवार को 2.7 यानी 0.8 का अंतर है। ऐसे में कह सकते हैं कि 24 गुना कम ताकत से धरती को हिलाने वाला भूकंप था।
दोनों भूकंप में 30 किमी दूरी
भारतीय भूकंप वैज्ञानिक डॉ. अरुण बापत का कहना है कि रविवार और सोमवार के भूकंप में आपसी कोई संबंध नहीं है। दोनो में 30 किमी का फासला था। महाराष्ट्र में लगातार करीब एक साल के भूकंप के झटके आते रहे थे लेकिन इनके केंद्रों के बीबच की दूरी 20-80 किमी तक रहती है। बंगाल में भी 60-70 साल पहले ऐसे छोटे-छोटे भूकंप आए थे। अफवाह आए तो विश्वास मत करिए। कोरोना से कोई ताल्लुक नहीं है।
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